अफगानिस्तान में लगातार हिंसा का दौर जारी है। तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान में कहर मचाकर रखा है। अब अफगानिस्तान में स्थित संयुक्त राष्ट्र के मुख्य परिसर पर हमला किया है। इस हमले में एक गार्ड की मौत हो गई। हालांकि अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ने तालिबान का नाम नहीं लिया और हमलावरों को सरकार विरोधी तत्व बताया।
संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ने बताया कि अफगानिस्तान के हेरात में सरकार विरोधी तत्वों ने संयुक्त राष्ट्र के मुख्य परिसर पर हमला किया, जिसके परिणामस्वरूप एक अफगान पुलिस गार्ड की मौत हो गई और अन्य अधिकारी घायल हो गया।
हालात बिगड़े
तालिबान लड़ाकों ने अफगानिस्तान के 20 प्रांतों में मोर्चा खोला हुआ है। कंधार में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि हजारों लोग शहर में फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं जबकि कई लोग सुरक्षित जगहों की ओर चले गए हैं। तालिबान आतंकी शहर के भीतर घुसने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं लेकिन अभी सफल नहीं हो पाए हैं। इसीलिए आसपास के जिलों में उन्होंने कब्जा जमा लिया है।
टोलो न्यूज ने बताया कि फरयाब प्रांत के मैमाना शहर में कई दर्जन रॉकेट तालिबान ने दागे हैं, जिसमें कई आम नागरिक मारे गए हैं।
अफगान रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता फवाद अमन ने कहा कि सेना यहां लगातार तालिबान के खिलाफ हवाई और जमीनी हमले कर रही है। जबकि हेरात प्रांत में बिगड़ते हालात देखते हुए अधिकारियों ने रात का कर्फ्यू लगा दिया है।
अमन के मुताबिक, सेना तालिबान के कब्जाए इलाकों पर मुक्ति अभियान चला रही है। अभी मरने वालों का सही आंकड़ा मुहैया नहीं हो पाया है।
अमेरिका ने चीजें अस्तव्यस्त कर दीं, हम तालिबान के प्रवक्ता नहीं : इमरान
वहीं, तालिबान के साथ सियासी समाधान ढूंढने की कोशिश में जुटे पाकिस्तान ने 2001 में अमेरिका के अफगानिस्तान पर हमला करने के मकसद पर सवाल खड़े किए हैं। पीएम इमरान खान ने कहा है कि अमेरिका ने अफगानिस्तान में चीजें अस्त-व्यस्त कर दी हैं।
खान ने यह भी कहा कि पाक सरकार तालिबान की प्रवक्ता नहीं है, इसलिए उसे अफगानिस्तान में विद्रोही गुट की कार्रवाई के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। खान ने कहा, तालिबान जो कुछ भी कर रहा है या नहीं कर रहा है, उसका हमले कोई लेनादेना नहीं है। हम न जिम्मेदार हैं और न तालिबान के प्रवक्ता हैं।