पाकिस्तान में बढ़ते आर्थिक संकट के बीच ये खबर आई है कि देश का विशाल बहुमत अब यह नहीं मानता कि देश सही दिशा में है। पाकिस्तान में इस समय कमरतोड़ महंगाई है। सरकारी खजाना भी संकट में है, जिसकी वजह से इमरान खान की सरकार को अपमानजनक शर्तों पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से कर्ज लेना पड़ा है। गुरुवार को ये खबर आई कि देश में सरकारी कर्ज 50 खरब (पाकिस्तानी) रुपये तक पहुंच गया है। गुरुवार को देश में पेट्रोलियम डीलरों ने हड़ताल कर दी। देर शाम पाकिस्तान सरकार को उनकी मांगें मानने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इप्सोस के सर्वे में सामने आई ये बात
इसी बीच पेरिस स्थित मार्केट रिसर्च और कंसल्टिंग फर्म इप्सोस ने पाकिस्तान के लोगों के बीच इसी महीने किए गए जनमत सर्वेक्षण की अपनी रिपोर्ट जारी की है। इस सर्वे के मुताबिक देश के 87 फीसदी लोगों की राय है कि पाकिस्तान गलत दिशा में जा रहा है। इप्सोस ने पाकिस्तान में ऐसा पिछला सर्वे अगस्त 2019 में किया था। तब सिर्फ 66 फीसदी लोगों की राय थी कि देश गलत दिशा में है। यानी सवा दो साल में ऐसी राय रखने वाले लोगों की संख्या 21 फीसदी बढ़ गई है। इसे इमरान खान सरकार के लिए एक बुरी खबर समझा जा रहा है।
इप्सोस ने कहा है कि पाकिस्तान में इसके पहले कभी इतनी बड़ी संख्या में लोगों की अपने देश के बारे में राय नकारात्मक नहीं थी। सर्वे का निष्कर्ष है कि पाकिस्तान के लोग सबसे ज्यादा महंगाई से परेशान हैं। 43 फीसदी लोगों ने इसे सबसे चिंताजनक मुद्दा बताया। जबकि 14 फीसदी लोगों ने बेरोजगारी और 12 फीसदी लोगों ने बढ़ती गरीबी को सबसे ज्यादा चिंताजनक समस्या माना। इसके अलावा सर्वे से सामने आया कि टैक्स में बढ़ोतरी और पाकिस्तानी रुपये के भाव में गिरावट के कारण भी पाकिस्तान के लोग असंतुष्ट हैं।
अक्षम है इमरान खान सरकार
विश्लेषकों का कहना है कि बीते दो साल में देश में महंगाई और बेरोजगारी में भारी इजाफा हुआ है। फिलहाल इन समस्याओं का मुकाबला करने में इमरान खान सरकार अक्षम दिख रही है। प्रधानमंत्री खान ने इस हफ्ते ये बात मंजूर की कि सरकारी खजाना खाली होने के कारण उनकी सरकार जन कल्याण पर खर्च बढ़ाने की स्थिति में नहीं है। राजकोषीय संकट से राहत पाने की कोशिश में ही पाकिस्तान सरकार ने आईएमएफ से कर्ज लिया। लेकिन जिन शर्तों पर कर्ज लिया गया, उसको लेकर भी इमरान सरकार देश में घिरती नजर आ रही है।
प्रधानमंत्री खान ने गुरुवार को फिर सफाई दी कि देश के बढ़ते व्यापार घाटे के कारण उनकी सरकार को आईएमएफ के सामने हाथ फैलाने पड़े। उन्होंने कहा कि देश का निर्यात जरूर बढ़ा है, लेकिन वह आयात से बहुत कम है। इस कारण व्यापार घाटा बढ़ा है। व्यापार घटा बढ़ने की वजह से रुपये की कीमत गिरी है और वही महंगाई का कारण है।
इस बीच एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक देश में उपभोक्ता विश्वास सूचकांक (कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स) में रिकॉर्ड गिरावट आई है। बीते दो महीनों में यह 12 अंक गिर कर अब 27.3 अंक पर पहुंच गया है। यह भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और टर्की जैसे उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों के बीच सबसे निम्नतम स्तर है।