फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना वायरस: डेल्टा वैरिएंट ने वैक्सीन के मामले में धनी देशों को बना दिया है और कंजूस

Mon, 09 Aug 2021 04:37 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

धनी देशों ने बूस्टर डोज लगाने की शुरुआत कर दी है, जबकि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और मानवीय सहायता से जुड़े संगठनों ने ऐसा न करने की सलाह दी है। इन संगठनों ने अपील की है कि जब बूस्टर डोज के फायदों के बारे में पूरी जानकारी सामने नहीं आ जाती, तब तक इसकी शुरुआत न की जाए...
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट को लेकर बढ़ती चिंता के बीच धनी देशों ने कोरोना वैक्सीन को अपनी मुट्ठी में बनाए रखने की कोशिशें तेज कर दी हैं। इसकी वजह से ये वैक्सीन अब गरीब और विकासशील देशों की पहुंच से और दूर हो रही है।

विज्ञापन


डेल्टा वैरिएंट की वजह से आई महामारी की नई लहर के कारण अमेरिका और यूरोपीय देशों में सबका टीकाकरण करने की मुहिम तेज कर दी गई है। दोनों जगहों पर उन लोगों को टीका लेने के लिए प्रोत्साहित करने की आकर्षक योजनाएं शुरू की गई हैं, जो इन्हें लगवाने से हिचकते रहे हैं। इसके लिए कुछ देशों में सीधे पैसा देने की स्कीम भी चालू गई हैं। जिन लोगों के संक्रमित होने का ज्यादा खतरा है, उन्हें टीके का बूस्टर डोज देने की शुरुआत भी की गई है।

दूसरी तरफ, गरीब और विकासशील देशों में टीके की कमी न सिर्फ बनी हुई है, बल्कि कई जगहों पर और बढ़ गई है। दक्षिण-पूर्व एशिया में टीकाकरण की दर निम्न बनी हुई है। इस क्षेत्र के देश महामारी की नई खतरनाक लहर का सामना कर रहे हैं। इन देशों में सरकारों के सामने ये कठिन चुनौती है कि जिन लोगों के लिए रोजी-रोटी के लिहाज से घर में बंद रहना संभव नहीं है, उन्हें कैसे संक्रमण से बचाया जाए। बिना पूरी आबादी का टीकाकरण किए ये सुनिश्चित करना संभव नहीं है।
विज्ञापन


धनी देशों ने बूस्टर डोज लगाने की शुरुआत कर दी है, जबकि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और मानवीय सहायता से जुड़े संगठनों ने ऐसा न करने की सलाह दी है। इन संगठनों ने अपील की है कि जब बूस्टर डोज के फायदों के बारे में पूरी जानकारी सामने नहीं आ जाती, तब तक इसकी शुरुआत न की जाए। उन्होंने आग्रह किया है कि तब तक धनी देशों को चाहिए कि उपलब्ध अतिरिक्त डोज गरीब देशों को मुहैया कराएं।

विज्ञापन

बीते हफ्ते विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस घेब्रेयसस ने कम से कम सितंबर तक बूस्टर डोज पर रोक लगाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि जब दुनिया के हर देश में कुल आबादी के दस फीसदी हिस्से का टीकाकरण नहीं हो जाता, तब तक बूस्टर डोज न लगाई जाएं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक धनी देशों में प्रति 100 व्यक्तियों पर लगभग 100 डोज लगाए जा चुके हैं। जबकि गरीब देशों में वैक्सीन की कमी के कारण प्रति 100 व्यक्तियों पर 1.5 डोज ही लगाए गए हैं।  

लेकिन जर्मनी और फ्रांस ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की अपील की अनदेखी कर दी है। उन्होंने बूस्टर डोज की योजना पर आगे बढ़ने का एलान किया है। ब्रिटेन की ड्यूक यूनिवर्सिटी के ग्लोबल हेल्थ इनोवेशन सेंटर की सहायक निदेशक आंद्रिया टेलर ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा कि दुनियाभर में संक्रमण रोकने के मकसद पर बूस्टर डोज को तरजीह देने का असर यह होगा कि सभी लोग खतरे में पड़ेंगे, जिनमें धनी देशों के बाशिंदे भी शामिल हैं।

टेलर ने कहा- ‘जैसा कि हमने दक्षिण एशिया में देखा, जहां संक्रमण बेकाबू हुआ और डेल्टा वैरिएंट की उत्पत्ति हुई। अफ्रीका में अभी कोई ऐसा उपाय नहीं है, जहां उस तरह की घटना को होने से रोका जा सके। इसलिए मुमकिन है कि हम ऐसी स्थिति पैदा कर दें, जिसमें अधिक खतरनाक और अधिक संक्रामक वैरिएंट आते रहें और उनका फैलना जारी रहे, जैसा कि हम अफ्रीका में होता देख रहे हैं।’
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें