बीते हफ्ते विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस घेब्रेयसस ने कम से कम सितंबर तक बूस्टर डोज पर रोक लगाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि जब दुनिया के हर देश में कुल आबादी के दस फीसदी हिस्से का टीकाकरण नहीं हो जाता, तब तक बूस्टर डोज न लगाई जाएं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक धनी देशों में प्रति 100 व्यक्तियों पर लगभग 100 डोज लगाए जा चुके हैं। जबकि गरीब देशों में वैक्सीन की कमी के कारण प्रति 100 व्यक्तियों पर 1.5 डोज ही लगाए गए हैं।
लेकिन जर्मनी और फ्रांस ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की अपील की अनदेखी कर दी है। उन्होंने बूस्टर डोज की योजना पर आगे बढ़ने का एलान किया है। ब्रिटेन की ड्यूक यूनिवर्सिटी के ग्लोबल हेल्थ इनोवेशन सेंटर की सहायक निदेशक आंद्रिया टेलर ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा कि दुनियाभर में संक्रमण रोकने के मकसद पर बूस्टर डोज को तरजीह देने का असर यह होगा कि सभी लोग खतरे में पड़ेंगे, जिनमें धनी देशों के बाशिंदे भी शामिल हैं।
टेलर ने कहा- ‘जैसा कि हमने दक्षिण एशिया में देखा, जहां संक्रमण बेकाबू हुआ और डेल्टा वैरिएंट की उत्पत्ति हुई। अफ्रीका में अभी कोई ऐसा उपाय नहीं है, जहां उस तरह की घटना को होने से रोका जा सके। इसलिए मुमकिन है कि हम ऐसी स्थिति पैदा कर दें, जिसमें अधिक खतरनाक और अधिक संक्रामक वैरिएंट आते रहें और उनका फैलना जारी रहे, जैसा कि हम अफ्रीका में होता देख रहे हैं।’