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मुस्लिम औरतों को चीन देता है बेहोशी की दवा, उइगर मुसलमान तुरसुन ने सुनाई दर्द भरी दास्तां

Tue, 27 Nov 2018 08:16 PM IST
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन
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uyghur women
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चीन में उइगर मुस्लिमों के साथ होने वाले अत्याचारों को लेकर पूरी दुनिया में आवाज उठ रही है। कई देश कनाडाई अगुआई में इस मामले को अपनी चीन यात्रा में उठाने की योजना बना चुके हैं। इसी बीच अमेरिका में इसी समुदाय की एक महिला ने आरोप लगाया कि उइगर कैंपों में महिलाओं पर जबरदस्त अत्याचार किया जाता है। उन्हें ऐसी दवाएं दी जाती हैं जिनसे महिलाएं बेहोश तक हो जाती हैं।
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वाशिंगटन में मिहरीगुल तुरसुन नामक उइगर महिला ने एक प्रेस वार्ता में चीन के भीतर उइगर मुस्लिमों के साथ होने वाले अत्याचारों की दर्दनाक दास्तां बयां की है। उसने बताया कि 2017 में गिरफ्तारी के बाद चार दिनों तक उससे लगातार पूछताछ की गई। इस दौरान उसे सोने भी नहीं दिया गया और उसके बाल तक काट दिए गए। कैंप के चीनी अधिकारियों को तुरसुन ने यह तक कहा कि इतना परेशान करने से बेहतर है कि मुझे मार दीजिए। हमें कैंप में बेहोशी की दवा दी जाती थी। इसके अलावा ऐसी दवाएं भी दी जाती थीं जिससे हमें ब्लीडिंग होती थी।

इस उइगर महिला ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि यहां जेल की एक ही सेल में करीब 60 महिलाओं को रखा जाता है। यहां इतनी सख्ती है कि महिलाओं को सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरे के सामने ही टॉयलेट जाना पड़ता है। मिहरीगुल तुरसुन ने बताया कि चीनी अधिकारियों ने उसके सिर पर हेलमेट जैसी चीज बांधी और कई बार इलेक्ट्रोक्यूट किया गया। मेरी नस-नस दर्द से कराह उठी। मेरे मुंह से सफेद झाग निकला और मैं बेहोश हो गई। मैंने एक चीनी को यह कहते सुना कि मेरा गुनाह सिर्फ इतना है कि मैं उइगर समुदाय से हूं।
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बच्चे की मौत पर भी नहीं पसीजे चीनी अधिकारी

चीन के उइगर समुदाय की मिहरीगुल तुरसुन चीन में पली-बढ़ी हैं। बाद में वह अंग्रेजी सीखने के लिए मिस्र चली गई। साल 2015 में चीन लौटते ही पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। इस दौरान उनके एक बच्चे की मौत भी हो गई लेकिन चीनी अधिकारी फिर भी नहीं पसीजे। अब तक तीन बार उसे गिरफ्तार किया जा चुका है।

चीनी दूतावास ने नहीं की कोई टिप्पणी

कई यातनाओं के बात तुरसुन को रिहा कर दिया गया, ताकि वह अपने बच्चों को मिस्र ले जा सके। लेकिन उसे चीन लौटने का आदेश दिया गया। इस बीच काहिरा में उसने अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क किया और वह अमेरिका के वर्जीनिया में बस गई। चीनी कैंप में हुए अत्याचार के बारे में जब अमेरिका स्थित चीनी दूतावास से पूछा गया तो उसने कोई टिप्पणी नहीं की।
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