मूर्ति ने अपने अपने भाषण के दौरान दावा किया कि उनके पति को पार्टी के वार्षिक सम्मेलन के केंद्र बिंदु में गेट क्रैशिंग (वार्म-अप कार्यक्रम) के बारे में जानकारी नहीं थी और उनके फैसले ने उनकी बेटियों कृष्णा और अनुष्का को भी आश्चर्यचकित कर दिया था।
इन्फोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति की बेटी ने सुनक की कई उपलब्धियों पर गर्व जताया और बताया कि कैसे उनकी ईमानदारी व निष्ठा ने पहली बार उन्हें उनकी ओर आकर्षित किया, जब वे स्टैनफर्ड विश्वविद्यालय में छात्र के रूप में मिले थे।
मूर्ति ने कहा, 'ऋषि और मैं एक-दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त हैं। हम एक टीम हैं और मैं उन्हें व पार्टी के प्रति अपना समर्थन जताने के लिए आज यहां से ज्यादा कहीं और होने की कल्पना नहीं कर सकती।'
उन्होंने कहा, ऋषि और मैं चौबीस की उम्र में मिले थे, जब हम दोनों अमेरिका में पढ़ाई कर रहे थे। शुरुआत से ही मैं उनकी दो चीजों से प्रभावित थी..एक अपना घर ब्रिटेन के लिए उनका गहरा प्यार और दूसरा उनकी यह सुनिश्चित करने की ईमानदार इच्छा कि अधिक से अधिक लोगों को अवसर मिलें। अक्षता ने कहा कि ऋषि के साथ रहना मेरी जिंदगी का सबसे आसान फैसला था।
वहीं, ऋषि सुनक ने पार्टी के नेता के रूप में कंजर्वेटिव पार्टी के सम्मेलन को संबोधित किया और प्रधानमंत्री के रूप में अपनी पदोन्नति का उदाहरण देते हुए कहा कि यह इस बात का सबूत है कि ब्रिटेन नस्लवादी देश नहीं है और उनकी त्वचा का रंग कोई बड़ी बात नहीं है।
सुनक ने कहा, कभी भी किसी को यह कहने दें कि यह एक नस्लवादी देश है। उन्होंने कहा, मेरी कहानी एक ब्रिटेन की की एक कहानी है कि कैसे एक परिवार तीन पीढ़ियों में डाउनिंग स्ट्रीट तक पहुंच सकता है।