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Cipher Case: इमरान की जमानत याचिका पर नौ अक्तूबर को खुली अदालत में होगी सुनवाई, इस्लामाबाद हाईकोर्ट का फैसला

Wed, 04 Oct 2023 05:20 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

एफआईए ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर इमरान खान की जमानत याचिका पर बंद कमरे में सुनवाई की मांग की थी। इसमें कहा गया था कि सरकारी गोपनीय जानकारियों के खुलासे से जुड़े मामले में खुली सुनवाई से अन्य देशों के साथ संबंध बिगड़ने का खतरा पैदा हो सकता है। 
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इमरान खान, इस्लामाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला (फाइल)
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विस्तार
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इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने बुधवार को फैसला सुनाया कि साइफर मामले में जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जमानत याचिका पर नौ अक्तूबर को खुली अदालत में सुनवाई होगी।

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इमरान खान ने पिछले साल मार्च में वॉशिंगटन में पाकिस्तान के दूतावास की ओर से भेजे गए एक गोपनीय राजनयिक केबल (साइफर) का खुलासा किया था। इसके बाद उनके खिलाफ गोपनीयता अधिनियम का कथित तौर पर उल्लंघन करने के लिए मामला दर्ज किया गया था। फिर उन्हें इस साल अगस्त में गिरफ्तार कर लिया गया था। 

पिछले हफ्ते संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी और खान की जमानत याचिका पर बंद कमरे में सुनवाई की मांग की थी। इसमें कहा गया था कि सरकारी गोपनीय जानकारियों के कथित खुलासे से जुड़े मामले में खुली सुनवाई से अन्य देशों के साथ संबंध बिगड़ने का खतरा पैदा हो सकता है। शीर्ष जांच एजेंसी ने खान और उनके करीबी सहयोगी शाह महमूद कुरैशी को मामले में 'मुख्य आरोपी' बनाया है।

पीटीआई प्रमुख इमरान खान और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। बुधवार को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) ने फैसला सुनाया कि जमानत याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई नौ अक्तूबर को होगी। हालांकि, जिओ न्यूज की खबर के मुताबिक इसमें कहा गया है कि संवेदनशील माने जाने वाले दस्तावेजों पर वकीलों की दलीलें बंद कमरे में सुनी जाएंगी।

'डॉन' अखबार की खबर के मुताबिक, विशेष अदालत के न्यायाधीश अबुअल हसनत जुल्करनैन ने अदियाला जेल में सुनवाई का नेतृत्व किया। इस बीच, पीटीआई के वकील सलमान सफदर ने साइफर मामले में पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व विदेश मंत्री कुरैशी के खिलाफ बंद कमरे में सुनवाई को 'असंवैधानिक' करार दिया। सफदर ने जेल के बाहर कहा, 'सुनवाई बंद दरवाजों के पीछे नहीं होनी चाहिए। यह असंवैधानिक है।' रिपोर्ट में उनके हवाले से कहा गया है, 'मामले में इमरान की गिरफ्तारी और रिमांड को भी गोपनीय रखा गया था, और अब इस मुकदमे को भी गोपनीय रखा जा रहा है।'

इमरान खान पर वाशिंगटन में पाकिस्तान के दूतावास से एक गोपनीय राजनयिक केबल लीक होने के संबंध में सरकारी गोपनीयता कानून के उल्लंघन का आरोप है। पिछले साल मार्च में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान से पहले क्रिकेटर से नेता बने खान ने इस्लामाबाद में एक जनसभा में अपनी जेब से कागज का एक टुकड़ा निकाला था और उसे लहराते हुए दावा किया था कि यह उनकी सरकार को गिराने के लिए रची जा रही 'अंतरराष्ट्रीय साजिश' का सबूत है।

समय पर चुनाव सुनिश्चित नहीं करने को लेकर इमरान राष्ट्रपति से नाखुश 
वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन ने आज बताया कि उनके भाई इस बात से नाखुश हैं कि राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने नेशनल असेंबली भंग होने के नब्बे दिनों के भीतर आम चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल नहीं किया। 

जिओ न्यूज की खबर के मुताबिक, जिन्ना हाउस हमले की सुनवाई के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अलीमा ने कहा कि उनके भाई और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के अध्यक्ष इस बात से नाराज हैं कि राष्ट्रपति ने चुनाव के लिए किसी निश्चित तारीख की घोषणा करने के बजाय केवल चुनाव के लिए कट-ऑफ तारीख की घोषणा की।

अलीमा ने यह भी कहा कि इमरान खान अपना वजन कम होने के बावजूद जेल में जोश में हैं। पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) प्रमुख को पिछले महीने लिखे पत्र में अल्वी ने सुझाव दिया था कि संविधान के अनुच्छेद 48 (5) के अनुसार, राष्ट्रपति के पास नेशनल असेंबली के भंग होने के 90 दिनों के भीतर चुनाव कराने का अधिकार है।
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राष्ट्रपति का पत्र स्पष्ट रूप से उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा क्योंकि पीटीआई चाहती थी कि राष्ट्रपति अल्वी मुख्य चुनाव आयुक्त को कट-ऑफ तारीख का सुझाव देने के बजाय चुनाव की सटीक तारीख की घोषणा करें। हालांकि, ईसीपी ने उनके सुझाव पर टिप्पणी करने से परहेज किया और बाद में घोषणा की कि चुनाव जनवरी 2024 के अंतिम सप्ताह में होंगे।
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