बीजिंग में शुक्रवार से शुरू हो रहे विंटर (शीतकालीन) ओलिंपिक खेलों से पहले यहां कोरोना महामारी की वजह से चिंता गहरा गई है। हाल में यहां कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमण अपेक्षाकृत अधिक तेजी से फैला है। हालांकि बीजिंग और आसपास के इलाकों में लगभग पूरी आबादी का पूरा टीकाकरण हो चुका है, लेकिन ओमिक्रॉन वैरिएंट से वैक्सीन लगवा चुके लोग भी संक्रमित हो रहे हैं। इसके बावजूद चीनी अधिकारी ओलिंपिक खेलों का आयोजन तय कार्यक्रम के मुताबिक कराने पर अडिग रहे हैं।
चीन ने इन खेलों के लिए ‘क्लोज लूप सिस्टम’ लागू किया है। बताया जाता है कि इसके पहले दुनिया में कहीं किसी खेल आयोजन के समय इतने सख्त नियम लागू नहीं किए गए। चीनी अधिकारियों के मुताबिक इस नियम के तहत खेलों से संबंधित व्यक्तियों को एक लूप के अंदर रहना होगा। मकसद यह है कि उनके बीच किसी तरह से संक्रमण ना पहुंच पाए। इसके तहत बीजिंग के लोगों को यहां तक निर्देश दिया गया है कि अगर कोई ओलिंपिक से संबंधित वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाए, तब भी वे उसकी मदद के लिए वहां ना पहुंचें।
विंटर ओलिंपिक खेलों के लिए पहुंचे मशहूर अमेरिकी एथलीट अपोलो ओहनो ने अमेरिकी वेबसाइट रॉलिंग स्टोन से बातचीत में कहा- ‘चीन ने अपना फैसला लिया है और वे उस पर अमल करने जा रहे हैं। वे खेल रद्द करने को तैयार नहीं हैं।’ लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये सवाल जरूर उठा है कि इतने सख्त उपायों के बावजूद क्या चीन सचमुच खेलों को ओमिक्रॉन से बचा सकेगा?
अमेरिका के मिनीसोटा स्थित सेंटर फॉर इन्फेक्सियस डिजीज रिसर्च एंड पॉलिसी के निदेशक माइकल ऑस्टरहोम ने वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा- ‘खरबों डॉलर का सवाल यह है कि क्या वे ओमिक्रॉन को हरा पाएंगे? सैद्धांतिक रूप से उन्होंने ऐसी योजना बनाई है, जो कोविड से खेलों को बचा लेगी। लेकिन यह योजना इस वायरस के खिलाफ सचमुच कितना प्रभावी होगी, इस बारे में मैं निश्चित रूप से कुछ नहीं कह सकता।’