तालिबान ने पिछले महीने यह कहा था कि वह ईटीआईएम को अफगानिस्तान की जमीन पर अपनी गतिविधियां चलाने की इजाजत नहीं देगा। हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू में तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा था कि तालिबान अल-कायदा या किसी ऐसे दूसरे गुट को अफगानिस्तान की जमीन का दुरुपयोग करने की इजाजत नहीं देगा। तालिबान के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी चीन यात्रा के दौरान ईटीआईएम के बारे में ऐसा ही वादा चीन के विदेश मंत्री वांग यी के सामने भी किया था।
उसके बावजूद चीन ने इस मामलेपर सतर्क रुख अपना रखा है। पिछले दिनों चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्तां से कहा कि वे चरमपंथ के खिलाफ अपने प्रयास तेज कर दें। उनकी इस टिप्पणी को अफगानिस्तान में पैदा हो रही स्थिति के संदर्भ में ही देखा गया है।
शी ने कहा कि चीन को जातीय विवादों और वैचारिक मुद्दों को हल करने के लिए सक्रियता से पहल करनी चाहिए। उन्होंने देश में जातीय अलगाववाद और धार्मिक चरमपंथ को जड़मूल से खत्म करने का आह्वान भी किया। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इन बातों में चीन में बढ़ रही चिंताओं की झलक मिली है। चीन को चिंता इस बात की है कि अगर ईटीआईएम ने हमले किए, तो उसे आतंकवादी विरोधी कदम सख्ती से उठाने होंगे और तब पश्चिमी देशों को मानव अधिकारों के मुद्दे पर उसकी आलोचना करने के नए मौके मिलेंगे।