अमेरिका ने तालिबान को अफगानिस्तान में कब्जा करने में मदद पर पाकिस्तान को फटकार लगाई है। विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने अमेरिकी सांसदों से कहा है कि अमेरिका देखेगा कि बीते बीस वर्षों में पाक की क्या भूमिका रही। दरअसल सांसदों ने 9/11 हमले के बाद अफगानिस्तान में पाक की ‘दोहरी नीति’ वाली भूमिका पर नाराजगी जताई और मांग की कि वाशिंगटन इस्लामाबाद से रिश्तों पर पुन: विचार करे।
अमेरिकी सांसदों ने बाइडन प्रशासन से अनुरोध किया कि वह पाकिस्तान के मुख्य गैर नाटो सहयोगी के दर्जे के बारे पर भी फिर से विचार करे। ब्लिंकन को नाराज सांसदों का सामना करना पड़ा। सांसदों ने अफगान सरकार के त्वरित पतन और अमेरिकियों की अफगानिस्तान से निकासी को लेकर विदेश मंत्रालय पर सवाल उठाए।
टेक्सास से डेमोक्रेट सांसद जोकिन कास्त्रो ने ब्लिंकन से कहा, तालिबान को पाक द्वारा लंबे समय से समर्थन देने और वर्षों से समूह के नेताओं को शरण देने के बाद, अब यह समय अमेरिका के लिए पाकिस्तानी रिश्तों के पुनर्मूल्यांकन और इस्लामाबाद के एक मुख्य गैर-नाटो सहयोगी के दर्जे पर पुन: विचार करने का है। इस पर ब्लिंकन ने कहा, इसे हम आने वाले दिनों में देखेंगे कि पाकिस्तान ने पिछले 20 वर्षों में क्या भूमिका निभाई है और आने वाले वर्षों में जिस भूमिका में हम उसे देखना चाहते हैं।
अमेरिकी सांसदों ने विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से सवाल किया, क्या उन्हें पता था कि अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़ने की योजना बना रहे हैं। इस पर ब्लिंकन ने कहा कि उन्होंने 14 अगस्त की रात को गनी से फोन पर बात की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि वह अंत तक लड़ेंगे। विदेश मंत्री ने कहा कि वह अफगानिस्तान छोड़ने की गनी की योजना से अवगत नहीं थे।
तालिबान व हक्कानी नेटवर्क को पाक मदद
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने माना कि पाकिस्तान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के आतंकियों को पाल रहा है। उन्होंने कहा, पाक को अफगानिस्तान के बारे में वैश्विक समुदाय की नीतियों के हिसाब से चलना चाहिए। जब उनसे अफगानिस्तान में पाकिस्तानी भूमिका पर सवाल पूछे तो ब्लिंकन ने कहा, पाक के अफगानिस्तान में बहुत सारे हित हैं जिसमें से कुछ से सीधे अमेरिकी हितों का साफ टकराव होता है।
पाकिस्तान पर आरोप है कि उसने पंजशीर को जीतने में तालिबान की मदद की। पाकिस्तान इन आरोपों का खंडन करता है। पाकिस्तान उन दो देशों में शामिल है जिनका तालिबान पर सबसे ज्यादा प्रभाव है। इसके अलावा दूसरा देश कतर है। पाकिस्तान के गृहमंत्री ने खुद माना है कि उनके यहां तालिबानी आतंकी और उनके परिवार रहते हैं। अमेरिका ने जब वर्ष 2001 में हमला किया तो ये आतंकी पाकिस्तान में छिप गए थे। ओसामा बिन लादेन को भी पाकिस्तान के ऐबटाबाद में मारा गया था। तालिबान की अंतरिम सरकार में गृहमंत्री बना सिराजुद्दीन हक्कानी आईएसआई का पाला हुआ है।