रूस ने इसी गुरुवार को ये घोषणा की थी कि तालिबान के प्रतिनिधियों को मास्को बुलाया गया है। ये आमंत्रण रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विशेष दूत जमीर काबुलोव ने भेजा है। पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि रूस ने अभी तक तालिबान को आतंकवादी संगठनों की अपनी सूची से नहीं हटाया है। इसके बावजूद वह इस संगठन की राजनीतिक शाखा से लगातार संपर्क में रहा है। अब वह इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है। इस प्रक्रिया को ‘मास्को फॉर्मेट’ के नाम से जाना जा रहा है।
मास्को फॉर्मेट के तहत अब तय हुई बैठक 20 अक्तूबर को होगी। उसमें भारत, चीन, पाकिस्तान, ईरान और अन्य कुछ देश भी भाग लेंगे। इस बीच तालिबान के सूत्रों ने कहा है कि जल्द ही रूस, अमेरिका, चीन और पाकिस्तान के साथ भी उसकी अलग से बैठक होने वाली है। रूस, अमेरिका और चीन ने अफगानिस्तान के मामले में त्रिपक्षीय वार्ता शुरू की थी। इस समूह को ट्रोइका कहा गया था। पाकिस्तान के उससे जुड़ने के बाद उसे ट्रोइका प्लस के नाम से जाना गया।
पर्यवेक्षकों का कहन है कि इस प्रक्रिया से जुड़े सभी देशों के बीच इस मुद्दे पर सहमति है कि अफगानिस्तान को फिर से आतंकवाद का अड्डा नहीं बनने दिया जाना चाहिए। अब ये बात मोटे तौर पर मान ली गई है कि तालिबान की अफगानिस्तान में सबसे बड़ी भूमिका है। इसलिए उससे वार्ताओं का नया दौर शुरू हो रहा है। इसमें उसे अपने प्रभाव में रखने की रस्साकशी के संकेत भी मिल रहे हैं।