फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अफगानिस्तान: वार्ताओं का नया दौर, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में तालिबान का बढ़ा महत्व

Sat, 09 Oct 2021 02:24 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को

सार

मास्को फॉर्मेट के तहत अब तय हुई बैठक 20 अक्तूबर को होगी। उसमें भारत, चीन, पाकिस्तान, ईरान और अन्य कुछ देश भी भाग लेंगे। इस बीच तालिबान के सूत्रों ने कहा है कि जल्द ही रूस, अमेरिका, चीन और पाकिस्तान के साथ भी उसकी अलग से बैठक होने वाली है। रूस, अमेरिका और चीन ने अफगानिस्तान के मामले में त्रिपक्षीय वार्ता शुरू की थी...
विज्ञापन
रूसी विशेष दूत जमीर काबुलोव के साथ तालिबान - फोटो : Agency (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अफगानिस्तान को लेकर कूटनीतिक रस्साकशी तेज होने के संकेत हैं। इसके बीच तालिबान की अहमियत बढ़ती दिख रही है। लगभग एक साथ इस खबर की पुष्टि हुई है कि रूस और अमेरिका दोनों ने तालिबान से नए सिरे से बातचीत करने की योजना बनाई है।

विज्ञापन


पहले खबर आई कि रूस ने तालिबान को वार्ता के लिए मास्को बुलाया है। फिर बताया गया कि रूस ने उस बैठक में शामिल होने के लिए चीन को भी आमंत्रित किया है। इसके अलावा पास-पड़ोस के रूस के कई सहयोगी देश भी आमने-सामने बैठ कर तालिबान से अफगानिस्तान के भविष्य के बारे में चर्चा करेंगे।

ये पहल ठीक उस समय ही हुई है, जब अमेरिका ने तालिबान के साथ फिर से दोहा में सीधी वार्ता शुरू करने की घोषणा की है। अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की वापसी और काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद दोनों पक्षों के बीच ये पहली आमने-सामने वार्ता होगी। हालांकि बताया जाता है कि इस दौरान दोनों पक्षों में परोक्ष संपर्क बना रहा है। शुक्रवार को ये खबर आई कि दोहा में होने वाली बातचीत में अमेरिकी विदेश मंत्रालय और खुफिया विभागों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।
विज्ञापन


अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा- ‘हम इस बात पर जोर डालेंगे कि तालिबान महिलाओं और लड़कियों सहित अफगानिस्तान के सभी नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करे।’ इसके अलावा अफगानिस्तान में मौजूद अमेरिकी नागरिकों और उसके अफगान सहयोगियों को वहां से सुरक्षित बाहर निकालने और अफगानिस्तान की जमीन का आतंकवाद के लिए इस्तेमाल न हो, उसे सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों पर भी बातचीत होगी।

उधर चीन के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उसे मास्को वार्ता में भाग लेने के लिए रूस का आमंत्रण मिला है। चीन ने कहा कि अफगानिस्तान के मुद्दे पर वह रूस सहित अपने तमाम सहयोगी देशों के साथ राय-मशविरे में जुटा हुआ है। मंत्रालय ने कहा कि चीन अफगानिस्तान और उसके पास-पड़ोस में स्थिरता लाने के किसी भी प्रयास का समर्थन करेगा।

विज्ञापन

रूस ने इसी गुरुवार को ये घोषणा की थी कि तालिबान के प्रतिनिधियों को मास्को बुलाया गया है। ये आमंत्रण रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विशेष दूत जमीर काबुलोव ने भेजा है। पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि रूस ने अभी तक तालिबान को आतंकवादी संगठनों की अपनी सूची से नहीं हटाया है। इसके बावजूद वह इस संगठन की राजनीतिक शाखा से लगातार संपर्क में रहा है। अब वह इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है। इस प्रक्रिया को ‘मास्को फॉर्मेट’ के नाम से जाना जा रहा है।

मास्को फॉर्मेट के तहत अब तय हुई बैठक 20 अक्तूबर को होगी। उसमें भारत, चीन, पाकिस्तान, ईरान और अन्य कुछ देश भी भाग लेंगे। इस बीच तालिबान के सूत्रों ने कहा है कि जल्द ही रूस, अमेरिका, चीन और पाकिस्तान के साथ भी उसकी अलग से बैठक होने वाली है। रूस, अमेरिका और चीन ने अफगानिस्तान के मामले में त्रिपक्षीय वार्ता शुरू की थी। इस समूह को ट्रोइका कहा गया था। पाकिस्तान के उससे जुड़ने के बाद उसे ट्रोइका प्लस के नाम से जाना गया।

पर्यवेक्षकों का कहन है कि इस प्रक्रिया से जुड़े सभी देशों के बीच इस मुद्दे पर सहमति है कि अफगानिस्तान को फिर से आतंकवाद का अड्डा नहीं बनने दिया जाना चाहिए। अब ये बात मोटे तौर पर मान ली गई है कि तालिबान की अफगानिस्तान में सबसे बड़ी भूमिका है। इसलिए उससे वार्ताओं का नया दौर शुरू हो रहा है। इसमें उसे अपने प्रभाव में रखने की रस्साकशी के संकेत भी मिल रहे हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें