तालिबान की वापसी के साथ आने वाले समय में अफगान नागरिकों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। रेडक्रॉस सोसाइटी के इंटरनेशनल फेडरेशन के निदेशक एलेक्जेंडर मैथ्यू ने बृहस्पतिवार को कहा कि वित्तीय संकट से जूझ रहे अफगानिस्तान में सर्दियों की दस्तक के साथ ही लोगों का जीवन पैसे के अभाव में और कठिन होगा।
रेडक्रॉस का कहना है कि लोगों को वेतन नहीं मिल रहा है। आय का कोई साधन भी नहीं है। अगले कुछ महीने में मौसम भी करवट लेने लगेगा। नतीजा ये होगा कि लोग भुखमरी, अनाज की कमी, सूखा, गरीबी और बिना इलाज बेमौत मरने को मजबूर होंगे। खासकर अफगानिस्तान के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भयावह हो सकती है, जहां लोगों का जीवन खतरे में पड़ना तय है।
रेडक्रॉस के इंटरनेशनल फेडरेशन ने 38 लाख अमेरिकी डॉलर की मांग की है जिससे स्वास्थ्य केंद्रों के साथ 16 अन्य प्रांतों में लोगों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें। रेड क्रॉस का कहना है कि अफगानिस्तान में वित्तीय संकट को खत्म करने पर काम करना होगा। लोगों का वेतन जारी किया जाए जिससे वे खाना, पानी और बिजली खरीद सकें।
रिहा हो सकते हैं फोटो जर्नलिस्ट मुर्तजा समादी
तालिबान के क्रूर चेहरे को दुनिया के सामने लाने वाले अफगानिस्तान के फोटो जर्नलिस्ट मुर्तजा समादी को तालिबानियों ने फांसी पर लटकाने का इरादा किया था। लेकिन अफगानिस्तान में बढ़ते विरोध के चलते तालिबान को पीछे हटना पड़ा और जल्द ही उन्हें रिहा भी कर सकता है। करीब तीन हफ्ते से मुर्तजा तालिबान की कैद में हैं। मुर्तजा पर फेसबुक के जरिए अफगान लोगों को भड़काने के आरोप हैं।
चीन ने अफगानिस्तान भेजी मदद की खेप
चीन ने अफगानिस्तान में तालिबान की अंतरिम सरकार को अपनी 31 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता की पहली खेप को भेज दिया है। इस मदद सामग्री में कंबल, जैकेट और अन्य सामग्रियां शामिल हैं। बीजिंग से बुधवार को देर शाम भेजी गई आपातकालीन मानवीय सहायता सामग्री देर रात काबुल पहुंची। अफगानिस्तान में काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इन सामग्रियों को शरणार्थी मामलों के कार्यवाहक मंत्री खलील-उर-रहमान हक्कानी को सौंपा गया।
इस दौरान चीन के राजदूत वांग यू भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि कई कठिनाइयों के बीच चीन कम समय में अफगानिस्तान के लिए आपातकालीन मानवीय सहायता सामग्री की व्यवस्था करने में कामयाब रहा। इसमें कंबल, सर्दियों में इस्तेमाल किये जाने वाले जैकेट व अन्य सामग्रियां हैं, जिसकी अफगानिस्तान के लोगों को तुरंत जरूरत है।