अफगानिस्तान में चुनी गई सरकार को उखाड़ फेंकने व ताकत के दम पर सत्ता हथियाने वाले तालिबान को पाकिस्तान, चीन व ईरान का साथ मिल गया है। पाक पीएम इमरान खान ने तो बड़ी बात कह दी है। उन्होंने तालिबान के सत्ता में काबिज होने का स्वागत करते हुए कहा कि गुलामी की जंजीरें टूट गई हैं।
अफगानिस्तान को एक बार फिर अंधकार के गर्त में ले जाने वाले तालिबान को चीन, ईरान व पाकिस्तान का समर्थन मिलना महाशक्ति देशों के लिए भी खतरे का संकेत है। चीन ने उम्मीद जताई है कि तालिबान का शासन स्थायी होगा, वहीं ईरान का कहना है कि अमेरिका की हार से स्थायी शांति की उम्मीद जागी है।
इमरान खान ने कही यह बात
पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने कहा कि जब आप दूसरे की संस्कृति अपनाते हैं तो फिर मानसिक रूप से गुलाम होते हैं। यह वास्तविक दासता से भी बुरा है। सांस्कृतिक गुलामी की जंजीरों को तोड़ना आसान नहीं होता है। अफगानिस्तान में इन दिनों जो हो रहा है, वह गुलामी की जंजीरों को तोड़ने जैसा है।'
पाकिस्तान राजनीतिक स्थिरता में अहम भूमिका निभाएगा: कुरैशी
इस बीच पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में राजनीतिक स्थिरता लाने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अफगानिस्तान से संपर्क रखना चाहिए। कुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान अपनी स्थिति को लेकर बहुत स्पष्ट है। हम सोचते हैं कि सिर्फ बातचीत से ही राजनीतिक समाधान निकलेगा। हम वहां लगातार गृहयुद्ध नहीं चाहते। अफगानिस्तान के पूर्व उप राष्ट्रपति मुहम्मद यूनस कानूनी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल से मुलाकात के बाद ट्वीट कर पाक विदेश मंत्री ने यह बात कही।
चीन बोला- समावेशी सरकार बनने की उम्मीद
चीन ने तालिबान के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है। साथ ही उम्मीद जताई कि वह समावेशी सरकार देगा। चीन ने सोमवार को कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि तालिबान अपने वादे पर खरा उतरेगा और देश में खुली एवं समावेशी विचारों वाली सरकार बनाएगा।
अमेरिका के असहमति के चलते तालिबान से खुश हैं ये देश
ईरान, रूस और चीन की अमेरिका से कई मुद्दों पर असहमति रही है। ऐसे में अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी को ये तीनों ही देश अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए एक अवसर के तौर पर देख रहे हैं। रूस ने तो तालिबान से पहले ही बात शुरू कर दी थी। चीन ने सोमवार को कहा कि तालिबान को काबुल में मौजूद विदेशी मिशनों को सुरक्षा देने और सभी को लेकर चलने के अपने वादे पर काम करना होगा।
इन देशों ने बंद किए दूतावास
अफगानिस्तान में तालिबान का राज आने के बाद अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों ने अपने दूतावासों को ही बंद कर दिया है और राजनयिकों को वापस निकाल रहे हैं। वहीं ईरान, चीन, रूस और पाकिस्तान जैसे देशों ने तालिबान में अब भी अपने दूतावासों में काम जारी रखा है।
बता दें कि तालिबान ने रविवार को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर भी कब्जा जमा लिया है। अमेरिका समर्थित सरकार के राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर भाग गए हैं। वहीं काबुल एयरपोर्ट पर लोगों का हुजूम उमड़ रहा है, जो देश छोड़कर निकलना चाहते हैं।