यूरोपीय संसद में एक प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसमें यूरोपियन यूनियन (ईयू) क्षेत्र को एलजीबीटी (लेस्बियन, गे, बाइ-सेक्सुअल, ट्रांसजेंडर) समुदाय के लिए ‘फ्रीडम जोन’ यानी आजाद इलाका घोषित करने की बात कही गई है। पिछले कुछ वर्षों में ईयू के सदस्य देशों पोलैंड और हंगरी में एलजीबीटी समुदायों के खिलाफ कई कदम उठाए गए हैं। वहां की सत्ताधारी पार्टियों ने लगातार इन समुदायों के खिलाफ माहौल गरमाए रखा है। यूरोपीय संसद में पेश हुए प्रस्ताव को उसी के जवाब में उठाया गया एक कदम समझा जा रहा है।
गौरतलब है कि 2019 में पोलैंड के 100 नगरपालिका क्षेत्रों ने खुद को ‘एलजीबीटी विचारधारा से मुक्त’ क्षेत्र घोषित कर दिया था। वहां इस पहल को स्थानीय राजनेताओँ और सत्ताधारी लॉ एंड जस्टिस पार्टी का पूरा समर्थन मिला था।
यूरोपीय संसद में बुधवार को पेश हुए प्रस्ताव में कहा गया है कि हंगरी में भी एलजीबीटी लोगों के मौलिक अधिकारों में गंभीर रूप से बाधा डाली गई है। गौरतलब है कि हंगरी में किसी व्यक्ति के खुद की पहचान ट्रांसजेंडर या इंटरसेक्स के रूप में करने पर कानूनी रोक लगा दी गई है। इऩ दोनों देशों में कन्वर्जन थेरेपी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसके तहत एलजीबीटी लोगों को अपनी यौन रुचि या पहचान बदलने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। जबकि दूसरी तरफ जर्मनी और माल्टा में इस थेरेपी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
यूरोपीय संसद में पेश प्रस्ताव को अनेक दलों के सदस्यों ने अपना समर्थन दिया है। प्रस्ताव पेश करने वाले समूह का दावा है कि उसके पास इसे पारित कराने के लिए बहुमत है, जो प्रस्ताव पर मतदान होने पर जाहिर हो जाएगा। इस समूह की उपाध्यक्ष और नीदरलैंड्स से यूरोपीय संसद के लिए निर्वाचित हुईं नेता लीसये श्रीनेमैचर ने कहा कि यह प्रस्ताव पोलैंड की स्विड्निक काउंटी में एलजीबीटी समुदाय पर लगाई गई पाबंदियों के दो साल पूरा होने के मौके पर लाया गया है।
स्विड्निक काउंटी ऐसा पहला क्षेत्र बना था, जहां इस तरह का नियम बनाया गया था। श्रीनेमैचर ने एक बयान में कहा, पुर्तगाल से बुल्गारिया तक और साइप्रस से फिनलैंड तक के सांसद एलजीबीटी लोगों के अधिकारों के हक में खड़े होंगे। वे इस बात को नहीं भूलेंगे कि एलजीबीटी लोगों के अधिकारों में कटौती एलजीबीटी को लेकर समाज में फैलाए गए भय को वैधता प्रदान करता है।
इस प्रस्ताव के समर्थकों ने पूरे यूरोप के स्थानीय अधिकारियों से अपील की है कि वे इस प्रस्ताव के उद्देश्यों का समर्थन करें। उन्होंने कहा है कि बिना राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता के इन उद्देश्यों को हासिल नहीं किया जा सकेगा। उनके मुताबिक इस वक्त पूरे यूरोप को यह संदेश भेजने की जरूरत है कि नफरत और भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यूरोपीय संसद बेल्जियम में एक होमोफोबिक (समलैंगिकों से नफरत) हमले में एक व्यक्ति की हत्या की भी चर्चा हुई है। लेकिन बेल्जियम की सरकार ने एलजीबीटी अधिकारों का समर्थन किया है। वहां के प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर डी क्रू ने एलजीबीटी समुदाय के इंद्रधनुषी झंडे के साथ खिंचवाई गई एक तस्वीर के साथ अपना संदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि ‘हमारे देश में नफरत के लिए कोई जगह नहीं है। यहां प्यार की जीत होती है।’
पिछले साल ईयू ने एलजीबीटी समुदाय के खिलाफ उठाए गए कदमों के कारण पोलैंड के छह शहरों को अनुदान देने से इनकार कर दिया था। जबकि उन शहरों का दावा है कि वे कैथोलिक क्रिश्चियन मान्यताओं की रक्षा कर रहे हैं। लेकिन एलजीबीटी समुदायों ने वहां उठाए गए कदमों भेदभाव से भरा बताया है। जानकारों का कहना है कि यूरोपीय संसद में हुई ताजा पहले से इन समुदायों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्हें यह संदेश जाएगा कि यूरोप का बहुमत उनके साथ खड़ा है।