भारत में हजारों साल पहले शुरू हुई योग की चेतना अब पूरी दुनिया में तेजी से प्रसारित हो रही है। पश्चिम के देश भी योग के लाभ को करीब से समझने लगे हैं। इसका एक उदाहरण पूरी दुनिया में 21 जून को आयोजित होने वाला विश्व योग दिवस है, जिसके जरिए भारत की इस लाभकारी प्राचीन पद्धति को अपनाए जाने और इसके अपने आप ही लोगों के बीच प्रचलित होने से जुड़े दृश्य देखने को मिलते हैं। योग की कुछ ऐसी ही लोकप्रियता अब अमेरिका में भी दिखाई दे रही है। इसके लाभकारी असर को वयस्कों और बुजुर्गों के साथ-साथ बच्चों में भी दर्ज किया जा रहा है। योग केंद्रों पर माता-पिता अपने बच्चों को लेकर भी पहुंच रहे हैं। लोग नाभि चक्र जाग्रत करने के लिए योग से जुड़ रहे हैं।
अमेरिका में इस तरह की योग वर्कशॉप की एक खास बात यह भी है कि इनमें योग के कठिन से कठिन आसनों को नए नाम दिए जाते हैं, जो कि अपने आप में काफी लुभाने वाले और प्रक्रिया को आसानी से बयां करने वाले होते हैं। उदाहरण के तौर पर- वयस्क और बच्चे एक गोले में बैठकर बर्गामॉट बबल ब्रीदवर्क के माध्यम से सत्र की शुरुआत करते हैं। यह प्रक्रिया बच्चों को गहरी सांस लेने की तकनीक सिखाने के लिए है। इसके जरिए बच्चे बर्गामॉट की खुशबू वाले बुलबुलों को अपने मुंह से तेज सांस छोड़कर उड़ाते हैं। एक तरह से देखा जाए तो योग में श्वसन तंत्र को नियंत्रित करने के लिए गहरी सांस लेने की तकनीक पहला चरण है। इतना ही नहीं योग वर्कशॉप में बच्चों को 25 मिनट के एक म्यूजिकल साउंड बाथ में शामिल किया जाता है, जिसमें वे कार्टून कैरेक्टर स्पॉन्जबॉब पर आधारित कहानी सुनते हुए उस पर ध्यान केंद्रित करते हैं। यह योग के जरिए बच्चों की एकाग्रता बढ़ाने का एक अहम चरण है, जिसे अमेरिका में नई तरह से ढालकर बच्चों के सिखाया जा रहा है। बीते पांच वर्षों में इस तरह की कक्षाओं की मांग तेजी से बढ़ी है।
योग के फायदों से जुड़ा ऐसा ही प्रयोग सबैश्चियन एलापट ने 2015 में अमेरिका में 'द स्पार्क' नाम के एक कला, योग और ध्यान आधारित कार्यक्रम शुरू कर किया था। अब वह न्यूयॉर्क और पेन्सिल्वेनिया दोनों जगहों पर अपने सत्र आयोजित करते हैं। उनका मानना है कि उन्होंने बच्चों के लिए जीवन की कठिनाइयों से निपटने का एक पूरा टूलबॉक्स विकसित किया है। किसी भी कला के सत्र की शुरुआत में वे बच्चों को 12 मिनट के लिए योग करवाते हैं, जिससे बच्चे दिनभर की नासमझियों को निकाल सकें। इसके बाद बच्चों को ब्रीदवर्क (सांस को नियंत्रित करने की प्रक्रिया) कराया जाता है। इसके बाद आखिर के लगभग 45 मिनट की कला से जुड़ी वर्कशॉप होती है।
अमेरिका में लोगों को डायबिटीज जैसी बीमारियों में भी योग के फायदे दिखाई दे रहे हैं। योग के जरिए शरीर को सुनना, तनाव को कम करना और रिलैक्स होना सिखाया जा रहा है। प्रशिक्षकों का दावा है कि इससे ब्लड शुगर भी बेहतर तरीके से नियंत्रित होने लगता है। बच्चों को ध्यान और सांस पर नियंत्रण (ब्रीदवर्क) सिखाने के लिए खास तरह के उपकरणों का इस्तेमाल हो रहा है। इनमें खिलौनों जैसे दिखने वाले स्टफ्ड टॉयज शामिल हैं, जो कि हाथ से दबाने पर दबने के बाद खुद ही फूल जाते हैं। इसके जरिए बच्चों को डायाफ्राम के जरिए सांस लेने की तकनीक दिखाई जाती है और लंबी सांस छोड़ने की प्रैक्टिस भी कराई जाती है।