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LPG Gas-Oil Crisis: क्यों बांग्लादेश को डीजल दे रहा भारत? India-Bangladesh Oil Deal

Thu, 12 Mar 2026 02:09 PM IST
Adarsh Jha अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम

मिडिल ईस्ट में जारी जंग का असर अब दुनिया के दूसरे देशों तक भी पहुंचने लगा है। कच्चे तेल और गैस की सप्लाई पर मंडराते संकट के बीच सवाल उठ रहा है अगर हालात और बिगड़े तो ऊर्जा की कमी से कौन-कौन से देश प्रभावित होंगे? इसी बीच भारत ने अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश के लिए एक अहम कदम उठाया है। भारत पाइपलाइन के जरिए 5000 टन डीजल बांग्लादेश भेज रहा है। आखिर इस फैसले की वजह क्या है… और क्या यह मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष से पैदा हुए संभावित ईंधन संकट का संकेत है? और सवाल ये भी है की जब ऐसी खबरें या रही हैं की भारत में भी ऊर्जा संकट पैदा हो रहा है। ये संभावनाएँ जताई जा रही है की अगर पश्चिम एशिया में हालात जल्द नहीं सुधरे तो भारत में भी तेज संकट मंडराने लगेगा ऐसे वक्त में आखिर भारत ने बांग्लादेश को तेज देना क्यों जरूरी समझा? आइए समझते हैं पूरी कहानी। 

पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी भीषण संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई देने लगा है। इस युद्ध के कारण कच्चे तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो रही है, जिससे कई देशों में ईंधन संकट गहराने की आशंका पैदा हो गई है। इसी बीच भारत ने अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश की मदद के लिए बड़ा कदम उठाया है। भारत मंगलवार को पाइपलाइन के जरिए बांग्लादेश को 5000 टन डीजल भेज रहा है।

इस बात की पुष्टि बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) के चेयरमैन मुहम्मद रेजानुर रहमान ने की है। उन्होंने बताया कि भारत से यह डीजल बांग्लादेश-भारत मैत्री पाइपलाइन के जरिए भेजा जा रहा है। सोमवार दोपहर से ही असम स्थित नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड से डीजल की आपूर्ति शुरू हो चुकी है।

बीपीसी के प्रवक्ता के मुताबिक यह डीजल बांग्लादेश के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र दिनाजपुर स्थित पारबतीपुर डिपो तक पहुंचेगा। करीब 5000 टन डीजल की यह खेप पूरी तरह पहुंचने में लगभग 45 घंटे का समय लग सकता है, यानी यह प्रक्रिया बुधवार शाम तक जारी रहने की संभावना है।

बांग्लादेश इस समय संभावित ऊर्जा संकट को देखते हुए अपने ईंधन भंडार को तेजी से बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। दरअसल मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण तेल की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो रही है। ऐसे में कई देश पहले से ही अपने ऊर्जा भंडार सुरक्षित करने में जुट गए हैं।

भारतीय उच्चायुक्त प्रणय कुमार वर्मा ने भी हाल ही में कहा था कि भारत बांग्लादेश के अतिरिक्त डीजल के अनुरोध पर सक्रिय रूप से विचार कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश भारत का करीबी मित्र है और भारत उसकी प्रगति और ऊर्जा सुरक्षा के लिए हरसंभव सहयोग देने को तैयार है।

ढाका को भेजी जा रही यह डीजल आपूर्ति किसी आपातकालीन सौदे का हिस्सा नहीं है, बल्कि भारत और बांग्लादेश के बीच पहले से मौजूद दीर्घकालिक ऊर्जा व्यापार समझौते के तहत हो रही है। इस समझौते के मुताबिक भारत हर साल लगभग 1,80,000 टन डीजल पाइपलाइन के जरिए बांग्लादेश को उपलब्ध कराता है। अभी भेजे जा रहे 5000 टन डीजल उसी वार्षिक कोटे का हिस्सा हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक बांग्लादेश अपनी कुल ईंधन जरूरत का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। ऐसे में वैश्विक आपूर्ति में जरा सी भी रुकावट वहां गंभीर संकट पैदा कर सकती है। मिडिल ईस्ट में जारी इजरायल-ईरान तनाव के कारण वहां पेट्रोल और डीजल की कमी महसूस की जा रही है।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई इलाकों में ईंधन की सीमित बिक्री यानी राशनिंग शुरू कर दी गई है। जमाखोरी रोकने के लिए प्रशासन लगातार छापेमारी भी कर रहा है।

भारत से भेजा जा रहा यह डीजल भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन (IBFP) के माध्यम से पहुंचाया जा रहा है। लगभग 131 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन असम के नुमालीगढ़ रिफाइनरी से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी होते हुए बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले के पारबतीपुर डिपो तक जाती है।

पहले भारत से बांग्लादेश तक डीजल रेल मार्ग से भेजा जाता था, लेकिन पाइपलाइन बनने के बाद परिवहन का समय और लागत दोनों काफी कम हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक संकट के बीच यह ऊर्जा सहयोग दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करता है।

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