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Bangladesh Plane Crash: विमान हादसे के बाद बांग्लादेश में गूंज रहीं दर्द की चीखें!

Wed, 23 Jul 2025 02:34 AM IST
सत्यम दुबे वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम

बांग्लादेश में विमान हादसे में मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। हादसे में अब तक 31 लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वालों में 25 बच्चे हैं। वहीं घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। बांग्लादेशी वायुसेना का एक एफ-7 प्रशिक्षण विमान सोमवार को ढाका के उत्तरा क्षेत्र के दियाबारी इलाके में माइलस्टोन स्कूल और कॉलेज परिसर में गिर गया था। इसके बाद विमान में आग लग गई थी। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस के विशेष सलाहकार सईदुर रहमान ने बताया कि अब मृतकों की संख्या 31 हो गई है और उनमें से 25 बच्चे हैं। मृतकों में से कई 12 वर्ष से कम उम्र के थे। अब तक 20 शव उनके परिवारों को सौंप दिए गए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दुर्घटना में हुई जानमाल की क्षति पर शोक व्यक्त करते हुए सहायता का आश्वासन दिया था। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, बर्न स्पेशलिस्ट डॉक्टरों और नर्सों की एक टीम जरूरी मेडिकल सहायता के साथ शीघ्र ही ढाका रवाना होगी। यह टीम मरीजों की स्थिति का आकलन करेगी और आवश्यकता पड़ने पर भारत में आगे के इलाज की सिफारिश करेगी। सूत्रों के अनुसार, टीम में दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल और सफदरजंग अस्पताल के दो डॉक्टर शामिल हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रारंभिक आकलन के आधार पर अतिरिक्त मेडिकल टीम भी भेजी जा सकती है।

ढाका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी में रहमान ने कहा कि हम चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखे हुए हैं। कुछ मरीजों की हालत बेहद गंभीर है। दुर्घटना में लगभग 170 लोग घायल हो गए हैं। मंगलवार को हादसे के विरोध में हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए। मिलस्टोन स्कूल और आस-पास के अन्य स्कूलों के छात्रों ने प्रदर्शन करते हुए मृतकों की सही जानकारी सार्वजनिक करने, पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने और पुराने और असुरक्षित ट्रेनिंग विमानों के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।

वहीं, अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकारों कानून सलाहकार आसिफ नजरुल, शिक्षा सलाहकार सीआर आबरार और प्रेस सचिव शफीकुल आलम जब घटनास्थल का दौरा करने पहुंचे तो छात्रों ने उनका घेराव कर लिया। साथ ही जोरदार नारेबाजी भी की। बात इतनी बढ़ गई कि अधिकारियों को एक स्कूल भवन में शरण लेनी पड़ी। सेना और अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी के बावजूद छात्र काफी आक्रोशित रहे।

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