नैनीताल की शांत और सुरम्य वादियों में सेलिंग विद स्टोरीज थीम के साथ आयोजित तीन दिवसीय नैनीताल लिटरेचर फेस्टिवल का समापन हुआ। उत्सव के अंतिम दिन साहित्य, इतिहास और सिनेमा का एक अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने न केवल कहानियों का जश्न मनाया बल्कि हमारे अतीत और वर्तमान के गहरे अंतर्संबंधों पर भी विचारोत्तेजक मंथन किया। दिन की शुरुआत इतिहास को देखने के पारंपरिक नजरिए को चुनौती देने वाली एक वैचारिक बहस से हुई। साहित्यिक सत्रों में लेखक अमिताभ बागची ने अपनी पुस्तक के माध्यम से शहरों की उन अनकही कहानियों और स्मृतियों को साझा किया जो, अक्सर मुख्यधारा के विमर्श से ओझल रह जाती हैं। इसी कड़ी में भारतीय दर्शन के चार पुरुषार्थों पर केंद्रित संवाद ने दर्शकों को जीवन में भौतिकता और आध्यात्मिकता के बीच संतुलन बनाने के अर्थ समझाए। सिनेमा प्रेमियों के लिए फिल्म निर्देशक विभु पुरी का सत्र विशेष आकर्षण रहा, जहां उन्होंने एक शुरुआती रचनात्मक विचार के पर्दे पर एक जीवंत कहानी में बदलने की जटिल प्रक्रिया को साझा किया। दोपहर के सत्र ''''ए गुड लाइफ'''' में चर्चित लेखक जेरी पिंटो ने रेवा रुद्र के साथ संवाद करते हुए जीवन के अंतिम पड़ाव और पेलिएटिव केयर की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने भावुकता के साथ बताया कि कैसे मानवीय संवेदनाएं एक कठिन जीवन को भी अर्थपूर्ण बना सकती हैं। वहीं, लौदूं उसी गुलाब तक सत्र में अमिताभ सिंह बघेल और अशोक पांडे ने महान फिलिस्तीनी कवि महमूद दरवेश की कविताओं के हिंदी अनुवाद और उनकी वैश्विक काव्य-दृष्टि पर गहराई से विमर्श किया। भाषा और अभिव्यक्ति के प्रेमियों के लिए वन लाइन एट ए समय सत्र विशेष रहा, जहां सबा और दीपक बलानी ने उर्दू की खूबसूरती और सोशल मीडिया के दौर में इसके नए, रचनात्मक प्रयोगों को रेखांकित किया। फेस्टिवल का समापन विभिन्न पुस्तक विमोचनों और बौद्धिक चर्चाओं के साथ हुआ, जिसने नैनीताल के संपूर्ण वातावरण को एक नई साहित्यिक और सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया। इस आयोजन ने सिद्ध किया कि शब्द और कहानियाँ आज भी समाज को गहराई से जोड़ने की क्षमता रखते हैं।