बागेश्वर में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का समापन हो गया। कला समेकित शिक्षा अवसर एवं चुनौतियां विषय पर केंद्रित इस सेमिनार के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने शिक्षा में कला के महत्व और नई शिक्षा नीति के प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की। बृहस्पतिवार को डायट सभागार में आयोजित सेमिनार के दूसरे दिन कुल 20 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। सत्र के मुख्य वक्ता एससीईआरटी देहरादून के डॉ. संजीव चेतन रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि विभिन्न विषयों में कला के महत्व पर सार्थक परिचर्चा समय की मांग है। डॉ. चेतन ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दृष्टिगत अब कला को महज एक विषय की परिधि से बाहर निकालकर समेकित शिक्षा के रूप में स्थापित करना होगा। तकनीकी सत्रों में निर्मल पुरोहित, हेम पाठक, डॉ. अंकुर परिहार, मंजू कश्यप, कुणाल शीला, प्रियंका पंत, श्वेता जोशी, रूपा हरड़िया, पंकज साह, कौस्तुबानंद उपाध्याय, डॉ. गोपाल जोशी, हरिमोहन कंसेरी, डॉ. हरीश दफौटी, रुकसाना बानो, पूनम रावत, जगदीश दफौटी और प्रियंका गोस्वामी सहित 20 शोधकर्ताओं ने अपने विचार रखे। सत्रों की अध्यक्षता डॉ. संजीव चेतन और डॉ. केएन कांडपाल ने की। शोध पत्रों के माध्यम से नवाचारी शैक्षणिक गतिविधियों और जीवन कौशल में कला की उपयोगिता पर गंभीर चिंतन-मनन किया गया। इस मौके पर डॉ. बीसी जोशी, किशन सिंह मलड़ा, डॉ. मनोज पांडे, केपी चंदोला, बीडी पांडेय, दीपा जोशी, उर्मिला उपस्थित रहे। डायट प्राचार्य डॉ. केएस रावत ने राष्ट्रीय संगोष्ठी को सफल बनाने के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।