चैत्रमास शुक्लपक्ष की प्रतिपदा पर मंगलवार को सूर्य की किरणों संग नव विहान हुआ तो काशीवासियों का रोम-रोम उमंग और उल्लास से खिल उठा। अस्सी से राजघाट तक सूर्योदय होते ही घंटा-घडियाल की गूंज के साथ अर्घ्य दिया और प्रभाती रागों से नवसंवत्सर 2081 की अगवानी की।