सावन के पहले सोमवार को वाराणसी में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने जीवन की नश्वरता और आस्था की अटूट शक्ति का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। एक ओर जहां बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी थी, वहीं दूसरी ओर उसी भीड़ के बीच से एक शव मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था। यह विरोधाभासी दृश्य काशी की उस अलौकिक पहचान का प्रतीक है, जहां मृत्यु को भी जीवन का एक अभिन्न अंग माना जाता है।