सुल्तानपुर में गोमती नदी पर निर्माणाधीन महावीरन पुल की बीम में दरार आने से सेतु निगम और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। दरार सामने आने के बाद निर्माण कार्य में गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई है। वहीं, ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दरार दिखाई देने के बाद उसे छिपाने के लिए बीम के प्रभावित हिस्से को बोरे और कपड़ों से ढकने का प्रयास किया गया। इससे निर्माण कार्य में अनियमितता और भ्रष्टाचार की आशंकाएं और गहरा गई हैं। कादीपुर विधानसभा क्षेत्र के गुदरा और लंभुआ विधानसभा क्षेत्र के सलाहपुर गांव के बीच गोमती नदी पर यह पुल बनाया जा रहा है। पुल का प्रस्ताव वर्ष 2018 में तैयार हुआ था। 2019 में निर्माण कार्य शुरू हुआ। परियोजना को वर्ष 2022 तक पूरा किया जाना था, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी अब तक स्लैब नहीं पड़ सका है। इस पुल के निर्माण के लिए पूर्व भाजपा विधायक देवमणि द्विवेदी और तत्कालीन सांसद मेनका संजय गांधी ने पहल की थी। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने परियोजना को मंजूरी दी थी। पुल की मूल स्वीकृत लागत 2146.36 लाख रुपये निर्धारित की गई थी। एक दिसंबर 2020 को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी होने के बाद विस्तृत ड्राइंग तैयार कर निर्माण कार्य शुरू किया गया था। पुल के पूरा होने से गोमती नदी के दोनों किनारों के 25 से अधिक गांवों के लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी। फिलहाल निर्माण में हो रही देरी और गुणवत्ता संबंधी सवालों ने परियोजना को फिर चर्चा में ला दिया है।