कांवड़ यात्रा के दौरान शामली में आस्था के साथ सेवा और मेहमाननवाजी की अनूठी मिसाल देखने को मिलती है। शिवरात्रि से करीब चार दिन पहले ही बनत, शामली और कैराना के कांवड़ मार्गों पर पड़ने वाले एक हजार से अधिक घरों के दरवाजे शिव भक्तों के लिए खुल जाते हैं। कांवड़िए यहां सिर्फ गुजरते नहीं, बल्कि लोगों के लिए मेहमान बन जाते हैं। कोई उनके लिए भोजन तैयार करता है तो कोई दूध, फल और नाश्ता उपलब्ध कराता है। कई परिवार शिव भक्तों के रात में ठहरने की भी व्यवस्था अपने घरों में करते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सेवा में जुटते हैं। बनत निवासी ठेकेदार आशु भी पिछले दो दिनों से अपने घर के बाहर शिव भक्तों के लिए भंडारा चला रहे हैं। उनकी पत्नी अपने हाथों से बनाए पेड़े और दूध कांवड़ियों को बांट रही हैं, जबकि बच्चे भी सेवा में सहयोग कर रहे हैं। आशु का कहना है कि कांवड़ियों की सेवा करना उनके लिए केवल परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और खुशी का विषय है।