सूर्यदेव की उपासना के महापर्व छठ पूजा का शनिवार को नहाय-खाय के साथ शुभारंभ हो गया। पहले दिन महिलाओं ने लौकी और चने की दाल बनाई। महिलाएं सुबह से ही घरों की साफ-सफाई में जुटी रहीं। इसके साथ ही महिलाओं ने धूप में गेहूं सुखाए। वहीं, शाहजहांपुर के घाटों पर नगर निगम के अधिकारियों ने साफ-सफाई कराई। घाटों का समतलीकरण कराया गया है। पूर्वांचल महासभा के अध्यक्ष सतीश चंद्र मिश्रा ने बताया कि छठ महापर्व का पहला दिन नहाय-खाय कहलाता है। इस दिन व्रत का संकल्प लिया जाता है। शनिवार को सुबह सूर्य निकलने से पहले महिलाओं ने आम की लकड़ी से दातुन किया। दिन में एक बार ही भोजन किया जाता है। उन्होने बताया कि आमतौर पर महिलाएं ही व्रत रखती हैं लेकिन कुछ पुरुष भी इस व्रत को रखते हैं। शनिवार को महिलाओं ने चने की दाल, लौकी और भात का प्रसाद ग्रहण किया। छठ पर्व में पूजा स्थल, प्रसाद और व्रती को साफ-सफाई का विशेष महत्व होता है। इसलिए लोगों ने घरों में साफ-सफाई की। रविवार को खरना होगा। इसमें गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण किया जाएगा। इसके साथ ही शाम से 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाएगा। संतान के सुख-समृद्धि के लिए छठी मइया की पूजा की जाएगी। पूर्वांचल समाज के लोगों के घरों में छठ पूजा से जुड़े लोकगीत गूंजते रहे।