कांवड़ मार्गों की खाने-पीने की दुकान पर संचालकों का नाम और पहचान अनिवार्य कर दिए जाने से दुकानदारों में बेचैनी बढ़ गई है। कांवड़ यात्रा तक कईं दुकानें बंद करने का फैसला लिया गया। अल्पसंख्यक समाज के कुछ दुकानदारों ने दूसरे समुदाय के लोगों को दुकान किराए पर दी या फिर साझेदारी कर ली है। करीब 240 किमी के कांवड़ मार्ग पर दुकानदारों के बीच ऊहापोह की स्थिति है।