मोहर्रम की दूसरी तारीख को इमाम हुसैन का काफिला मदीने से चलकर कर्बला पहुंचा था। इसी कर्बला में इमाम हुसैन पर वह जुल्म ढाए गए, जो लोगों को आज भी खून के आंसू रोने के लिए मजबूर करता है। यह बातें मौलाना हसन मुज्तबा ने लाकड़ीवालान में मरहूम अली यावर नकवी के मकान पर आयोजित मजलिस में अपनी तकरीर के दौरान कही। मजलिस में मौजूद अजादारों की आंखें इमाम हुसैन पर हुए जुल्म को सुनकर नम हो गईं। मजलिस के बाद मातमी अंजुमनों ने नौहा पेश कर लोगों को पुरसा दिया।