राधाकृष्ण की लठामार रंगीली होली की परंपरा का शुभारंभ पहली चौपाई के साथ होते ही राधारानी की नगरी रंग, रस और भक्ति में सराबोर हो गई। संध्या आरती के बाद लाडली जी महल से निकली पहली चौपाई के साथ ढप, मृदंग, और झांझ की थाप पर गोस्वामी समाज के लोग नाचते गाते आगे बढ़े। अबीर और गुलाल की उड़ान ने वातावरण को रंगीन बना दिया और रंगीली गली से लेकर रंगेश्वर महादेव तक होली के पदों की गूंज सुनाई देती रही। बसंत पंचमी के बाद से ही बरसाना में होली का रंग चढ़ने लगता है। इसी परंपरा के क्रम में निकली पहली चौपाई में गोस्वामीजन भाव विभोर होकर पद गाते नजर आए। हर मोड़ पर भक्ति और रस का दृश्य सजीव होता चला गया। श्रद्धालु भी पदों की धुन पर थिरकते दिखे और चौपाई के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते रहे।