राधाकुंड। धार्मिक एवं पौराणिक नगरी राधाकुंड में आगामी 1 नवंबर को आयोजित होने वाले प्रसिद्ध अहोई अष्टमी मेले की तैयारियां जोरों पर है। मेले के महत्व और धार्मिक मान्यताओं पर प्रकाश डालते हुए आचार्य विष्णु शुक्ला ने बताया कि यह पावन पर्व श्री राधा-श्याम कुंड के प्रकट दिवस के उपलक्ष्य में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। आचार्य विष्णु शुक्ला के अनुसार अहोई अष्टमी की मध्यरात्रि में राधाकुंड में स्नान करने की प्राचीन एवं अलौकिक परंपरा है। मान्यता है। कि जो भी नि:संतान दंपति अहोई अष्टमी की तिथि पर पूरे मनोयोग और श्रद्धाभाव से राधाकुंड में स्नान करते है। उन पर राधा रानी की विशेष कृपा होती है। और उनकी सूनी गोद भर जाती है। इसी अटूट विश्वास के कारण प्रतिवर्ष देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ आकर पुण्य स्नान करते है। मेले के सकुशल संचालन और श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा को लेकर प्रशासन व स्थानीय पुलिस बल भी मुस्तैद है।