कृपा धाम मंदिर फजलगंज में चल रही श्रीराम कथा के सातवें दिन गुरुवार को आचार्य कृष्ण गोपाल ने भगवान राम के वन गमन, केवट और भरत से मिलाप के प्रसंग का बखाना किया। उन्होंने कहा कि यदि परिवार के बुजुर्गों की छाया बनी रहे तो जीवन में किसी भी प्रकार की चिंता नहीं रहती। वर्तमान में लोग बुजुर्गों का सम्मान करना भूल गए है। राजा दशरथ से 14 वर्ष के वनवास की आज्ञा पाकर प्रभुराम वन के लिए निकल जाते हैं। वह सीता व लक्ष्मण के साथ कुछ समय चित्रकूट में रुकते हैं। वहीं राम के वन जाने की जानकारी पर भरत अपने गुरुजनों और माताओं के साथ उनको वापस लाने के लिए जाते हैं। राम के वापस नहीं आने पर भरत उनकी खड़ाऊ लेकर लौटते हैं। कथा के दौरान राम भक्त ले चला रे राम की निशानी...भजन सुनकर भक्त भावविभोर हो उठे। इसके बाद आचार्य ने शूर्पणखा वध, सीता हरण का भी प्रसंग सुनाया। मौके पर सुनील कपूर, सपना, दीप्ति, श्रुति कपूर, प्रमोद तिवारी, पंकज झा, राजीव चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे।