केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने संयुक्त रूप से निजीकरण और नई श्रम संहिताओं के विरुद्ध पैदल मार्च निकाल कर शक्ति प्रदर्शन किया। श्रमिक नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी सात सूत्रीय मांगें पूरी नहीं हुईं, तो औद्योगिक अशांति की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।