जो है अलबेला मृग नैनों वाला..., मधुबन में जो कन्हैया किसी गोपी से मिले राधा कैसे न जले... जैसे गीतों पर मंगलवार को इस्कॉन मंदिर में राधा और कान्हा की प्रेम भरी अठखेलियों के शहर के हजारों लोग गवाह बने। मौका था अमर उजाला और अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) की ओर से आयोजित घर-घर राधा-कान्हा प्रतियोगिता का। इसमें राधा और कान्हा बनकर आए डेढ़ से लेकर सात साल तक के बच्चों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। घर-घर राधा-कान्हा कार्यक्रम की शुरुआत राधा बनी आस्था पांडेय के नृत्य से हुई। उन्होंने आयो रे कान्हां आयो रे... गीत पर प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस्कॉन मंदिर का पूरा प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसके बाद सबसे पहले डेढ़ से तीन साल के बच्चों ने राधा-कान्हा का रूप रख अपनी नटखट अदाओं से सभी का मन मोह लिया।