विश्व भोजपुरी सम्मेलन के प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी ने कहा कि भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग संगठन सरकार से लगातार कर रहा है। 20 करोड़ से अधिक लोगों द्वारा बोली जाने वाली भोजपुरी भाषा को अब तक संवैधानिक मान्यता नहीं मिलना राजनीति में व्याप्त भेदभाव का परिणाम है। भोजपुरी भाषा विश्व के सांस्कृतिक ताने-बाने की एक मजबूत कड़ी बन चुकी है। गिरमिटिया मजदूरों के रूप में विदेशों में गए लोगों ने अपनी मातृभाषा को जीवित रखा है और आज भी दर्जनों देशों में भोजपुरी संस्कृति पर्वों के रूप में मनाई जाती है। बावजूद इसके, यह भाषा सरकारी स्तर पर उपेक्षित रही है।