चंदौली के पक्खोपुर गांव में 12 दिसंबर से चल रहे लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का गुरुवार को हवन और भंडारे के साथ समापन हो गया। जीयर स्वामी जी महाराज ने अंतिम दिन कथा के दौरान कामना को परिभाषित करते हुए अपने भक्तों को सीख दी। कहा कि कामना ही दुख का कारण है। इसका त्याग किए बिना कोई सुखी नहीं रह सकता है। जब हमारे अंतरण में किसी प्रकार की कामना नहीं रहेगी तब हमें भगवत प्राप्ति की भी इच्छा नहीं करनी पड़ेगी। संसार की कामना से पशुता का और भगवान की कामना से मनुष्यता का आरंभ होता है। मनुष्य का जीवन तभी कष्ट में होता है जब उसके मन में सुख की इच्छा होती है और मृत्यु तभी कष्टमई होती है जब जीने की इच्छा होती है। यदि वस्तु की इच्छा पूरी होती हो तो उसे पूरी करने का प्रयत्न करते और यदि जीने की इच्छा पूरी होती तो मृत्यु से बचने का प्रयत्न करते। परंतु इच्छा के अनुसार ना तो सब वस्तुएं मिलती है और न हीं मृत्यु से बचाव ही होता है। इच्छा का त्याग करने में सब स्वतंत्र हैं कोई पराधीन नहीं है और इच्छा की पूर्ति करने में सब पराधीन है कोई स्वतंत्र नहीं है। सुख की इच्छा आशा और भोग यह तीनों संपूर्ण दुखों के कारण है। यजमानों व श्रद्धालुओं से हवन कराया गया इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उपस्थित थी।