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जनकपुर माइनर एक घंटे में टूटी, 22 गांवों की धान की फसल संकट में, VIDEO

धान की रोपाई के लिए आस लगाए बैठे किसानों को एक बार फिर मायूसी हाथ लगी है। बुधवार को लतीफशाह डैम से जनकपुर माईनर में पानी छोड़े जाने के कुछ ही देर बाद माईनर 200 मीटर आगे टूट गई, जिससे पानी बहकर राइट कर्मनाशा नहर में चला गया। नतीजतन, माईनर को तत्काल बंद करना पड़ा, और किसानों की सिंचाई की उम्मीद अधूरी रह गई। जनकपुर माईनर क्षेत्र के करीब 22 गांवों के किसानों के लिए मुख्य सिंचाई स्रोत है। मौजूदा समय में धान का बीज तैयार हो चुका है और खेतों में रोपाई का काम शुरू होने वाला था। ऐसे समय में माईनर में पानी आना किसानों के लिए बड़ी राहत की उम्मीद लेकर आया था।बुधवार को किसानों की मांग पर सिंचाई विभाग द्वारा राइट कर्मनाशा नहर के साथ जनकपुर माईनर को भी खोला गया। लेकिन जनकपुर माईनर में वर्षों से जमी मिट्टी और सिल्ट की सफाई नहीं की गई थी। जैसे ही पानी का प्रवाह बढ़ा, उसका दबाव माईनर की कच्ची दीवारों को झेल नहीं सका और नहर महज एक घंटे में ही टूट गई।माईनर टूटने के बाद वहां का सारा पानी बहकर राइट कर्मनाशा नहर में पहुंच गया। सिंचाई विभाग ने आगे और नुकसान रोकने के लिए तुरंत पानी बंद कर दिया। स्थानीय किसानों ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि यह कोई पहली बार नहीं है जब जनकपुर माईनर टूटी है। हर साल मानसून के आते ही माईनर के टूटने की घटना दोहराई जाती है, लेकिन इसके स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। नहर की उचित मरम्मत और गाद सफाई समय रहते नहीं होती, जिससे यह स्थिति बनती है। जनकपुर माईनर के सहारे खेती करने वाले किसानों का कहना है कि अब रोपाई का समय आ गया है, लेकिन पानी नहीं मिलने से खेत सूखे पड़े हैं। अगर जल्द ही माईनर की मरम्मत नहीं हुई और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बनाई गई, तो धान की पूरी फसल पर संकट मंडरा सकता है किसानों ने सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि टूटे हिस्से की तत्काल मरम्मत कर पानी बहाल किया जाए। साथ ही माईनर की नियमित देखभाल, मिट्टी-सिल्ट सफाई और पक्कीकरण पर ध्यान दिया जाए, ताकि हर साल किसानों को इस परेशानी से न गुजरना पड़े।

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