चंदौली जिले के पड़ाव से गोधना तक करीब 320 करोड़ रुपये की लागत से बने सिक्स लेन एवं फोरलेन मार्ग की हरियाली योजना पर सवाल खड़े हो गए हैं। सड़क के डिवाइडर पर करीब चार महीने पहले लाखों रुपये की लागत से लगाए गए खजूर के पेड़ों में से 50 प्रतिशत से अधिक पेड़ देखभाल और नियमित सिंचाई के अभाव में सूख गए हैं। अब इन सूखे पेड़ों को जेसीबी की मदद से उखाड़कर ट्रकों में लादकर निस्तारित किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क निर्माण के दौरान 500 से अधिक हरे-भरे पेड़ काटे गए थे। उस समय लोक निर्माण विभाग की ओर से पर्यावरण संरक्षण के तहत कटे पेड़ों के बदले 10 गुना पौधे लगाने का दावा किया गया था। हालांकि अब तक डिवाइडर पर करीब 200 खजूर के पेड़ ही लगाए जा सके, जिनमें से 100 से अधिक पेड़ सूख चुके हैं। सूखे पेड़ों को हटाए जाने का कार्य इन दिनों तेजी से चल रहा है। जेसीबी मशीन से पेड़ों को उखाड़कर ट्रकों में भरकर ले जाया जा रहा है। इससे पौधरोपण योजना की गुणवत्ता, रखरखाव और सरकारी धन के उपयोग पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय पर सिंचाई और देखभाल की व्यवस्था की जाती तो अधिकांश पेड़ों को बचाया जा सकता था। अब लोगों का सवाल है कि कटे हुए सैकड़ों पेड़ों की पर्यावरणीय भरपाई आखिर कब और कैसे होगी? साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दोबारा प्रभावी पौधरोपण कराया जाए, ताकि सड़क के किनारे हरियाली का उद्देश्य पूरा हो सके।