महिला अपराधों को लेकर शासन की सख्त नीति और अभियोजन विभाग की सक्रिय भूमिका का असर अब नतीजों में दिखने लगा है। अपर निदेशक अभियोजन सत्यव्रत त्रिपाठी ने बृहस्पतिवार को बाराबंकी में अभियोजन अधिकारियों के साथ बैठक कर महिला अपराधों की गहन समीक्षा की और अभियोजन की कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि बाराबंकी में हाल ही में ‘पॉक्सो एक्ट’ के तहत दर्ज एक मुकदमे में अभियोजन पक्ष की प्रभावशाली पैरवी से मात्र एक माह के भीतर आरोपी को 20 वर्ष की सजा दिलाई गई है। यह उदाहरण बताता है कि अभियोजन पक्ष अब केवल मुकदमे चलाने तक सीमित नहीं, बल्कि दोषसिद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में परिणामकेंद्रित काम कर रहा है। अपर निदेशक त्रिपाठी ने बताया कि पूरे जनपद में अपराधियों को जल्द सजा दिलाने के लिए त्वरित न्याय अभियान’ चलाया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक न्यायालय से पांच-पांच महत्वपूर्ण मुकदमों का चयन कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जा रहा है। अभियोजन अधिकारी गवाहों और पुलिस विवेचना टीम से समन्वय बनाकर साक्ष्य को पुख्ता करने में जुटे हैं ताकि कोई भी अपराधी तकनीकी आधार पर छूट न पाए। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में गवाह या वादी विपरीत बयान हो जाते हैं, उन पर अब सख्त रवैया अपनाया गया है। ऐसे लोगों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है ताकि न्याय प्रक्रिया बाधित न हो। साथ ही अभियोजन अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे पीड़ितों के संपर्क में रहकर मुकदमे के हर चरण की जानकारी देते रहें, जिससे पीड़ित पक्ष का मनोबल बना रहे।