बाराबंकी जिला की एक रेलवे क्रॉसिंग 24 घंटे में करीब 120 बार बंद होती है, और हर बार किसी न किसी जिंदगी को खतरे में डालती है। यह क्रॉसिंग, जो शहर और बंकी को जोड़ती है, अब "मौत का फंदा" बन चुकी है। हर घंटे लंबा जाम, घंटों बंद गेट और लाचार लोग। यहां मौत और जिंदगी के बीच का फासला बस एक रेलवे फाटक जितना रह गया है। कैद लाखों लोग, मौत की दस्तक बंकी नगर पंचायत की एक लाख की आबादी अक्सर इस क्रॉसिंग के बंद होने पर अपने घरों में कैद हो जाती है। जाम में फंसे मरीजों के दम तोड़ने की खबरें अब आम हो गई हैं। हाल ही में एक एंबुलेंस घंटों तक जाम में फंसी रही और मरीज की जान चली गई। मजबूर लोग खतरे में डाल रहे जिंदगी क्रॉसिंग का बंद होना जैसे यहां की दिनचर्या बन गया है। हर 5-10 मिनट पर ट्रेन गुजरती है और कभी-कभी एक साथ 6-7 ट्रेनें। गाड़ियों की कतारें इतनी लंबी हो जाती हैं कि लोग जान जोखिम में डालकर बंद क्रॉसिंग पार करने लगते हैं। बीते कुछ महीनों में ऐसे कई हादसे हो चुके हैं जहां लोग ट्रेन की चपेट में आ गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह क्रॉसिंग उनकी जिंदगी को तबाह कर रही है। हम अपनी जिंदगी जी नहीं रहे, बस जाम में फंसे वक्त काट रहे हैं। वोटों के खेल में 'मौत का इंतजार' सालभर पहले सांसद और डीआरएम ने ओवरब्रिज या अंडरपास बनाने का वादा किया था, लेकिन हकीकत यह है कि फाइलें धूल खा रही हैं। क्रॉसिंग के आसपास बने मकानों को कारण बताकर काम अटका दिया गया है। जागरूक लोग पूछते हैं कि क्या लाखों लोगों की जिंदगी से बढ़कर हैं ये मकान..! रेलवे अधिकारियों ने बताया कि एक साल पहले प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। हालांकि लोग अब पूछ रहे हैं कि इसे अमली जामा कब पहनाया जाएगा। आखिर बंकी रेलवे क्रॉसिंग को ओवर ब्रिज अंडर पास कब मिलेगा।