राम मंदिर में राजा राम के साथ मां सीता और तीनों भाई के लिए पहले रक्षाबंधन का त्योहार अति विशिष्ट और ऐतिहासिक होने वाला है। श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त पर राम दरबार के सभी विग्रहों को बड़ी बहन शांता की ओर से मधुबनी शैली में बनी जरी और मोतियों की राखियां बांधी जाएंगी। यह राखियां महाराष्ट्र के मशहूर कारीगर शत्रुघ्न राखी वाला ने बनाई है। इसके साथ लखनऊ में केले के रेशे से भी राखी बनाई गई है, जो रामलला और राजाराम को भेंट की जाएगी। जिले में श्रृंगी ऋषि आश्रम से छठवें श्री रामलला रक्षाबंधन महोत्सव के तहत चार दिवसीय आयोजन संपन्न किए जाएंगे। लखनऊ से राखियां आज अयोध्या पहुंची, जिसे श्रृंगी ऋषि आश्रम महबूबगंज ले जाया जाएगा। कल छह अगस्त को गणपति भगवती पूजन के साथ यज्ञ अनुष्ठान, रक्षा सूत्र पूजन, सरयू मां का जलाभिषेक और शंखनाद सहित कई अनुष्ठान किए जाएंगे। इसी के साथ सात अगस्त को विष्णु सहस्त्रनाम पाठ, सामूहिक हनुमान चालीसा, दुरदूरिया पूजन, मेहंदी स्टाल, कजरिया तीज महिला झूलनोत्सव सहित कई कार्यक्रम संपन्न होंगे। इसके साथ ही आठ तारीख को सत्यनारायण कथा संपन्न करने के बाद नौ अगस्त को रक्षाबंधन के दिन श्रृंगी आश्रम से गाजे बाजे के साथ शोभायात्रा कारसेवकपुरम पहुंचेंगी। इसके बाद कारसेवक पुरम से राम मंदिर जाएगी, जहां पर श्रृंगी ऋषि बाबा महोत्सव सेवा संस्थान की ओर से यह राखी राम मंदिर ट्रस्ट को सौंपी जाएगी, जिसे रामलला सहित राजाराम, तीनों अनुज व हनुमान जी को बांधी जाएगी। मान्यता है कि पुत्रेष्ठ यज्ञ के मूर्धन्य आचार्य श्रृंगी ऋषि का विवाह चक्रवर्ती महाराज दशरथ की पुत्री देवी शांता के साथ हुआ था। इस कारण से रक्षाबंधन पर देवी शांता की ससुराल से प्रभु श्रीराम और उनके अनुजों के लिए रक्षा सूत्र कारसेवकपुरम भेजा जा रहा है।