दीपोत्सव के लिए समूची अयोध्या इस समय राममय हो चुकी है। हर ओर भक्ति, उत्साह और रोशनी का माहौल है। इस बार दीपोत्सव से पहले एक बड़ा निर्णय लिया गया है। राम मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार (जिससे होकर श्रद्धालु रामलला के दर्शन करने जाते हैं) का नामकरण कर दिया गया है। इस द्वार को 'जगद्गुरु रामानंदाचार्य द्वार' के नाम से जाना जाएगा। यह घोषणा शनिवार को धनतेरस के शुभ अवसर पर की गई है। इससे श्रद्धालुओं में अपार हर्ष है। राम मंदिर का मुख्य गेट फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। इस दीपोत्सव पर रामलला और राजा राम के मंदिर में एक लाख से अधिक दीप जलाए जाएंगे। खास बात यह है कि ये दीप गाय के गोबर से बनाए गए हैं, ताकि मंदिर के पत्थरों को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। यह पर्यावरण संरक्षण और परंपरा का सुंदर संगम है। इसके साथ ही इस बार डिजिटल लाइटिंग सिस्टम का भी प्रयोग किया जा रहा है। इससे मंदिर परिसर आकर्षक रोशनी में नहा उठा है। श्रद्धालु और पर्यटक दोनों ही इस भव्य नजारे को देखने के लिए उत्साहित हैं। अयोध्या अब एक बार फिर दिव्यता और भक्ति से जगमगाते ऐतिहासिक दीपोत्सव के लिए तैयार है।