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अयोध्या में कूटरचित दस्तावेजों से मंदिर की संपत्ति पर कब्जे का खुलासा

रामनगरी अयोध्या में मंदिरों और मठों की बेशकीमती ज़मीन पर अवैध कब्ज़े के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब अयोध्या जिला न्यायालय में लंबित एक मामले में बड़ा खुलासा हुआ है, जहां कूटरचित दस्तावेज़ों के सहारे करोड़ों की मंदिर संपत्ति पर कब्ज़े की साजिश सामने आई है। मामला अयोध्या कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत प्रमोद वन इलाके में स्थित जानकी निवास मंदिर से जुड़ा है।न्यायालय की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मंदिर पर कब्ज़ा करने की नीयत से महज्जरनामा तैयार किया गया था, जिसमें अयोध्या के प्रतिष्ठित संतों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। इस मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास के फर्जी हस्ताक्षर भी दस्तावेज़ों में दर्शाए गए थे।हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की जांच में ये हस्ताक्षर पूरी तरह फर्जी पाए गए। न्यायालय ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि कूटरचित दस्तावेज़ों के जरिए मंदिर की बेशकीमती संपत्ति हड़पने का प्रयास किया गया। राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल लेने दास ने कहा कि जानकी निवास मंदिर के महंत निमिया बाबा के निधन के बाद वैष्णव परंपरा के अनुसार मदन मोहन दास को मंदिर का महंत नियुक्त किया गया था। वर्तमान में मदन मोहन दास द्वारा मंदिर की परंपराओं और व्यवस्थाओं का विधिवत संचालन किया जा रहा है। वहां तो मदन मोहन दास की अधिवक्ता नेहा श्रीवास्तव ने कहा कि इसी बीच विपक्षी रामकुमार द्वारा फर्जी दस्तावेज़ तैयार कर, कूटरचित हस्ताक्षरों के जरिए महज्जरनामा बनाया गया और मंदिर की संपत्ति पर कब्ज़े की साजिश रची गई।यह पूरा मामला फर्जी दस्तावेज़ और कूटरचित हस्ताक्षरों का है। न्यायालय की जांच और हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट से सच्चाई सामने आ गई है। अब पुलिस द्वारा विवेचना जारी है।

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