अयोध्या में इमामबाड़ा जवाहर अली खां में आयोजित याद-ए-शोहदा कार्यक्रम में मानवता, एकता और बलिदान का संदेश गूंजता नजर आया। अल कायम फाउंडेशन ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में देश-विदेश से जुड़े गणमान्य लोगों ने शिरकत की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत में ईरान के प्रतिनिधि और ईरानी कल्चर हाउस के अयातुल्लाह डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने अपने संबोधन में कहा कि सुप्रीम लीडर सैय्यद अली ख़ामनाई की शहादत ने पूरी दुनिया को मानवता के नाम पर एकजुट करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आज हर धर्म और मजहब के लोग उन्हें याद कर रहे हैं और उनके विचारों से प्रेरणा ले रहे हैं। प्रख्यात वक्ता मौलाना डॉ. कल्बे रुशैद रिजवी ने कहा कि खामनाई सिर्फ एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक दर्सगाह थे, जिन्होंने हमेशा सच और न्याय का साथ दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने शहादत को स्वीकार किया, लेकिन किसी भी दबाव के आगे झुकना पसंद नहीं किया। कार्यक्रम में समाजसेवी धर्मवीर सिंह बग्गा, लश्करी मंदिर के महंत अरुण दास समेत विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे और आपसी भाईचारे पर जोर दिया। इसके अलावा मौलाना नदीम रजा जैदी, मौलाना वसी हसन खां, मौलाना मोहम्मद मोहसिन और मौलाना कमर मेंहदी सहित कई उलेमाओं ने शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश करते हुए समाज में एकता और इंसानियत को मजबूत करने का संदेश दिया।