अमेठी जिले की चारों नगर निकाय व प्रमुख कस्बों में सड़क व पटरियां अतिक्रमण का शिकार हैं। पटरियां अस्थाई दुकानदारों के लिए बिक जाती हैं तो जाम की मंडी का भाव चढ़ जाता है। ऐसे में सड़क तक लगने वाली दुकानें और सड़कों पर बेतरतीब खड़े वाहन राहगीरों की परेशानी को बढ़ा देते हैं। स्थानीय प्रशासन व ट्रैफिक पुलिस सब कुछ जानने के बाद अनजान होकर तमाशबीन बन जात हैं। जाम लोगों की पूरी दिनचर्या को भी प्रभावित कर रहा है। जाम में फंसकर एंबुलेंस पर बैठे मरीज अस्पताल में देर से पहुंचते हैं। जाम से कार्यालय आने-जाने में समय लगता है। हादसे के साथ प्रदूषण की भी समस्या गंभीर होती जा रही है। जिले की नगर निकाय अमेठी, गौरीगंज, जायस और मुसाफिरखाना हैं। वहीं, जिले की रामगंज, भादर, टीकरमाफी, मुंशीगंज, शाहगढ़, जगदीशपुर, कमरौली, इन्हौना, फुरसतगंज, बहादुरपुर व मोहनगंज मुख्यमार्गों के किनारे बसने से प्रमुख कस्बों के रूप में विकसित हो गए हैं। इन सभी स्थानों पर ज्यादातर सड़कें अतिक्रमण की चपेट में हैं। नाली के बाहर सड़क तक स्थाई व पटरी दुकानदारों का कब्जा है। ठेले खुमचें के साथ सड़क तक सब्जी व फलमंडी लगती है। पटरी और काली सड़क तक जब इन दुकानदारों का कब्जा हो जाता है तो आने वाले ग्राहक अपने दो व चार पहिया वाहन सड़क पर आड़ा तिरछा खड़ा कर खरीददारी में मशगूल हो जाते हैं फिर उसके बाद जाम की स्थिति बन जाती है। जाम में फंसकर राहगीर, स्कूली बच्चे एंबुलेंस व अन्य आवश्यक कार्य से निकले लोग परेशान हो जाते हैं। तिराहों चौराहों पर खड़ी ट्रैफिक पुलिस तमाशबीन बनी रहती है। वहीं, इन मार्गों से निकलने वाले जिला व संबंधित विभागों के अधिकारी सब कुछ जानकर अनजान बने रहते हैं।