मनुष्यों के हृदय, यकृत, गुर्दे और सहित हर अंग में माइक्रो प्लास्टिक के अंश मिल रहे हैं। यह दावा पद्म श्री डॉ. अजय ने अपने एक शोध में है। डॉ. अजय के अनुसार हमारे शरीर के हर अंग में रक्त का प्रवाह होता है। ये प्लास्टिक हमारे भोजन से हमारे खून में पहुंचे गया है तो तमाम अंगों में इसका मिलना कोई हैरत की बात नहीं है। कुछ वर्षों पहले विश्व विख्यात वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. अजय कुमार सोनकर ने माइक्रोप्लास्टिक पर किए शोध के आधार पर जिस खतरे का अंदेशा जताया था, उसके दुष्परिणाम अब दिखने लगे हैं। इधर कुछ समय से दुनिया भर से रिपोर्ट आ रही है कि मानव हृदय में माइक्रोप्लास्टिक पाया गया तो कभी मानव की यकृत में प्लास्टिक की मौजूदगी दर्ज हुई। इन सूक्ष्म कणों के प्रसार और स्वास्थ्य पर उनके गंभीर दुष्परिणाम को लेकर चिंताएं अचानक बढ़ गई हैं। डॉ. अजय कुमार सोनकर के अनुसार हाल ही में प्रकाशित अध्ययन में न्यू मैक्सिको विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा मानव अंडकोष में माइक्रोप्लास्टिक पाए जाने के लगभग एक महीने बाद यह नया मामला प्रकाश में आया है। डॉ. अजय तमाम अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्र पत्रिकाओं के साथ अपने शोध को साझा करते आ रहे हैं। जिनमें इन्होंने बताया कि किस प्रकार मानव सहित अन्य जीवों और वनस्पतियों में माइक्रोप्लास्टिक पहुंच रहा है। हमारे सांस लेने वाली वायु, पीने वाले जल और हमारे भोजन की थाली में ये प्लास्टिक के कण पहुंच गए हैं। ये कण इतने बारीक हैं कि वाष्पीकरण से बादलों में पहुंच जाते हैं और बारिश के द्वारा धरती के सुदूर ग्लैशियर, जंगल, पहाड़ सहित पृथ्वी के पोर-पोर में पहुंच गए हैं।