डिजिटल दौर की यह पीढ़ी अपनी बात खुलकर रखना चाहती है और माता-पिता से अपनी बात सुने जाने की उम्मीद भी करती है। ऐसे में गुस्सा, उपेक्षा या फिर अत्यधिक नियंत्रण इन्हें भावनात्मक रूप से आहत कर सकते हैं। यह चिंता केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। अलीगढ़ के काउंसलिंग केंद्रों पर भी ऐसे परिवारों की संख्या बढ़ रही है, जहां बच्चों का व्यवहार व रिश्तों में बढ़ती दूरी और संवादहीनता की कहानी कह रहा है।