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VIDEO: खामियों से फंसी 6500 से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री, आधार कार्ड और खतौनी में अलग नाम की आ रही हैं समस्या

किसानों को डिजिटल पहचान दिलाने के लिए गांव-गांव शिविर लगाए जा रहे हैं। हर पंचायत में एक कर्मचारी नामित कर जिम्मेदारी दी है। पर, आधार कार्ड और खतौनी में दर्ज नाम में अंतर व हिस्सेदार का अंश निर्धारण न होने से 6500 से अधिक किसान फार्मर रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे हैं। जिला प्रशासन ने शत प्रतिशत किसानों की फार्मर रजिस्ट्री बनाने के लिए चार विभागों को लगाया है। इसमें कृषि, राजस्व के लेखपाल, मनरेगा के रोजगार सेवक और पंचायती राज विभाग से पंचायत सहायक शामिल हैं। हर पंचायत में एक कर्मचारी को हर रोज कम से पांच रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य दिया है। कृषि विभाग इसका नोडल है। पंचायतों में लग रहे शिविरों में किसानों के सामने दो समस्याएं ज्यादा आ रही हैं। इनमें पहली है खतौनी में दर्ज नाम में कुछ अक्षर, उपनाम आदि में अंतर और दूसरी समस्या खतौनी में राजस्व विभाग का समय से काश्तकार का अंश निर्धारण नहीं करना। तहसील खेरागढ़ के सायपुर गांव के किसान उदय सिंह ने बताया कि उनके आधार कार्ड और खतौनी नाम तो एक ही है, लेकिन आधार कार्ड में नाम के पीछे उपनाम है। इसी कारण फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो सकी है। शमसाबाद के गांव बरौरा कला के प्रभु ने बताया कि कई बार कृषि विभाग के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन फार्मर रजिस्ट्री नहीं हुई है। पंचायत सहायक के पास गए तो बताया गया कि अंश निर्धारण होने के बाद हो जाएगी। उनका नाम लेखपाल के पास भेज दिया है। वहां से जितना जल्दी हो जाएगा उतनी ही जल्दी फार्मर रजिस्ट्री बन जाएगी। कृषि उपनिदेशक मुकेश कुमार ने बताया कि शिविर में खतौनी में दर्ज नाम में गलती और अंश का स्पष्ट निर्धारण होने के ज्यादा मामले आ रहे हैं। ऐसे लोग कई बार कार्यालय भी आ जाते हैं। उनकी सूचना संबंधित लेखपालों के पास भेजी जा रही हैं।

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