चैत्र नवरात्र में नौ दिन के दौरान बहुत ही विधि-विधान से मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-उपासना का शास्त्रों में विधान है, तो आइए जानते हैं दूसरे दिन में देवी ब्रह्मचारिणी के स्वरूप के बारे में। शास्त्रों में ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। मां अपने इस स्वरूप में दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल लिए रहती हैं। माँ दुर्गा का यह दूसरा स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनन्तफल देने वाला है।