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Tonk News: टोंक में वन विभाग की लापरवाही, तारों में फंसने से पैंथर की मौत

Sat, 24 Jan 2026 06:49 PM IST
टोंक ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोंक

जिले में लेपर्ड की गतिविधियों के बीच शुक्रवार को एक लेपर्ड की दर्दनाक मौत हो गई। एक खेत की बाड़ के तारों की जाली में लेपर्ड की गर्दन फंस गई, जिससे उसका दम घुट गया और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

किया गया अंतिम संस्कार
घटना बनास नदी के पास चिरोंज जाने वाले रास्ते के एक खेत में हुई। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। पशु चिकित्सक की निगरानी में पोस्टमॉर्टम कराए जाने के बाद मृत लेपर्ड का दूधिया बालाजी क्षेत्र वन चौकी में अंतिम संस्कार किया गया।

तार फंदा बन गया जानलेवा
सहायक वन संरक्षक अनुराग महर्षि ने बताया कि सुबह ग्रामीणों ने सूचना दी कि चिरोंज मार्ग के पास लेपर्ड पड़ा है और उसके गले में तार का फंदा फंसा है। वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और पशु चिकित्सक को बुलाया गया। पशु चिकित्सक डॉ. अशोक सैनी के अनुसार, प्रारंभिक तौर पर मृतक की मौत गले में तार फंसने के कारण दम घुटने से हुई प्रतीत होती है। मृत लेपर्ड की उम्र लगभग तीन साल थी और शरीर पर अन्य कोई गंभीर चोटें नहीं थीं।

टोंक जिले में लेपर्ड मूवमेंट बढ़ा
वन विभाग ने बताया कि टोंक जिले के निवाई, शिवपुरी, चिरोंज, बहड़, बस्सी, जिला मुख्यालय, राजमहल, टोडारायसिंह सहित अन्य क्षेत्रों में लेपर्ड की संख्या और गतिविधियों में वृद्धि हुई है। लेकिन इस नर पैंथर की मौत ने वन अधिकारियों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ा दी है।

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राजस्थान के विभिन्न जिलों में लेपर्ड की मौजूदगी
राजस्थान में जयपुर, अलवर, सीकर, भरतपुर, करौली, बूंदी, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, राजसमंद, अजमेर, पाली, सिरोही, जालोर, डूंगरपुर, झुंझुनूं, सवाईमाधोपुर, धौलपुर, कोटा, झालावाड़, बारां, टोंक और दौसा जिलों में लेपर्ड पाए जाते हैं। इसके अलावा बाड़मेर और जोधपुर में भी कभी-कभी अजमेर, पाली, राजसमंद और सिरोही के जंगलों से लेपर्ड का मूवमेंट होता है।

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