राजस्थान से राज्यसभा सांसद नीरज डांगी ने विशेष उल्लेख के माध्यम से दिल्ली की लैंड पूलिंग पॉलिसी और ‘मास्टर प्लान दिल्ली-2041’ को अंतिम रूप देने में हो रही देरी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा था कि अनिश्चितता में किसानों, ग्रामीणों और मध्यम वर्गीय निवेशकों सहित जमीन मालिकों द्वारा जीवन भर की जमा पूंजी विकास के नए अवसरों के लिए निवेश कर दी, लेकिन इसके विपरीत उनकी जमीनें अभी भी इस योजना में फंसी हुई हैं। बुनियादी ढांचे का विकास ठप है और मुकदमें बढ़ रहे हैं।
नीरज डांगी ने सरकार को घेरा
राज्यसभा सांसद नीरज डांगी ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए मांग की कि स्पष्ट समय-सीमा के साथ एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाए और लैंड पूलिंग पॉलिसी को मिशन मोड में लागू किया जाए। साथ ही, छोटे जमीन मालिकों को आने वाली प्रक्रियागत समस्याओं को दूर कर समन्वित तरीके से ‘मास्टर प्लान दिल्ली-2041’ को जल्द अधिसूचित किया जाए।
छोटे जमीन मालिकों के लिए कठिनाई
उन्होंने बताया कि लैंड पूलिंग पॉलिसी 2013 में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में लाई गई थी, जिसका उद्देश्य स्वैच्छिक भागीदारी के जरिए नियोजित शहरी विकास को बढ़ावा देना था। लेकिन 2018 में किए गए संशोधनों—जैसे फ्लोर एरिया रेशियो को 400 से घटाकर 200 करना और संघ बनाना अनिवार्य करना—ने छोटे जमीन मालिकों के लिए कई व्यावहारिक कठिनाइयाँ पैदा कर दीं। नतीजतन, एक दशक बाद भी यह नीति अधिकांश क्षेत्रों में प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सकी है।
बुनियादी ढांचा अधूरा है- नीरज डांगी
आगे सांसद नीरज डांगी ने सवाल उठाते हुए कहा कि लंबे समय से बनी अनिश्चितता ने निवेशकों और जमीन मालिकों की उम्मीदों को झटका दिया है। कई लोगों ने सहकारी समितियों के माध्यम से निवेश किया, लेकिन विकास कार्य आगे नहीं बढ़ पाए। बुनियादी ढांचा अधूरा है और कानूनी विवाद बढ़ते जा रहे हैं।
लैंड पूलिंग पॉलिसी का क्रियान्वयन हुआ ठप्प
डांगी के अनुसार, ‘मास्टर प्लान दिल्ली-2041’ को अंतिम रूप देने में देरी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है, जबकि क्षेत्रीय विकास और आधारभूत ढांचे की योजना के लिए यह अत्यंत आवश्यक है। इस व्यापक योजना के अभाव में लैंड पूलिंग पॉलिसी का क्रियान्वयन लगभग ठप हो गया है।
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मिशन मोड लागू करने की मांग
सांसद डांगी ने सरकार से एक स्पष्ट और समय-सीमा वाले रोडमैप के साथ लैंड पूलिंग पॉलिसी को मिशन मोड में लागू करने की मांग की। उनका कहना था कि छोटे जमीन मालिकों को प्रभावित करने वाली प्रक्रियागत बाधाओं को दूर करें। समन्वित कार्यान्वयन के लिए उचित संस्थागत तंत्र स्थापित कर 'मास्टर प्लान दिल्ली-2041' की अंतिम अधिसूचना शीघ्र जारी करें, ताकि नियोजित विकास निवेशकों का विश्वास और लाखों जमीन मालिकों की आकांक्षाएं पुनः स्थापित हो सकें।