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कैसे बुझेगी प्यास: आज भी नदी किनारे झिरियां खोदकर पानी का जुगाड़ कर रहे ढूंढावरवासी; दूषित पेयजल पीने को मजबूर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बारां Updated Sat, 02 May 2026 01:22 PM IST

डिजिटल इंडिया और विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच शाहाबाद उपखंड क्षेत्र का ढूंढावर गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग-27 से महज 3 किलोमीटर दूर बसे इस गांव के ग्रामीण आज भी नदियों का दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं।

करीब 180 मतदाताओं वाले इस गांव में कुन्नू और तिलपसी नदियां ही पानी का मुख्य स्रोत हैं। गर्मी बढ़ते ही हालात और बदतर हो जाते हैं, जहां महिलाओं को रोजाना करीब एक किलोमीटर का कठिन रास्ता तय कर नदी तक पहुंचना पड़ता है।

झिरियां खोदकर जुटाते हैं पानी
ग्रामीणों के अनुसार नदी किनारे कंकड़-पत्थर हटाकर छोटे-छोटे गड्ढे खोदे जाते हैं। घंटों इंतजार के बाद जब मिट्टी नीचे बैठती है, तब मटमैले पानी को कपड़े से छानकर बर्तनों में भरा जाता है। यही पानी पीने और घरेलू उपयोग में लिया जाता है।

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गांव के प्राथमिक विद्यालय और मां-बाड़ी केंद्र में पढ़ने वाले बच्चों को भी यही दूषित पानी पीना पड़ रहा है। स्कूल की टंकियों में भी नदी का पानी ही भरा जाता है। गांव में एकमात्र हैंडपंप है लेकिन उसका पानी खारा और पीने योग्य नहीं है।

बरसात में बढ़ जाता है खतरा
बरसात के मौसम में नदियां उफान पर होती हैं, जिससे पानी लाना और भी जोखिम भरा हो जाता है। ऐसे समय में ग्रामीण खेतों के कुओं का सहारा लेते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं हैं।

जनप्रतिनिधियों पर नाराजगी
ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में कोई सुध लेने नहीं आता। ग्रामीणों का कहना है कि हम वर्षों से नारकीय जीवन जी रहे हैं। 

प्रशासन ने जांच का भरोसा दिया
मामले की जानकारी मिलने पर शाहाबाद बीडीओ हर्ष कुमार महावर ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था। यदि यह आबादी क्षेत्र में आता है, तो इसकी जांच कराकर जल्द ही पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

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