अलवर जिले में गुरुवार शाम को अचानक मौसम बिगड़ गया। दिन भर मौसम ठीकठाक रहा, लेकिन शाम को करीब चार बजे तूफान शुरू हो गया और तेज बारिश से हालात बिगड़ गए। शहर में रात को जलाने के लिए जो होली सभी स्थानों पर बनाई हुई थी, वह भी भीग गई और रात को होली कैसे जलेगी, यह सवाल भी खड़ा हो गया।
कई जगह तो लोगों ने बारिश से बचने के लिए होली को पन्नियों और तिरपाल से ढक दिया। लेकिन ज्यादातर जगह यह भी सम्भव नहीं हुआ और होली में लगाई गई लकड़ियां और गोबर के छाने भी पूरी तरह भीग गए। लोगों के लिए मुश्किल यह भी हो गई कि बची हुई लकड़ियां और गोबर के छाने अब बमुश्किल ही जलेंगे और इसके लिए लोगों को जुगाड़ करना पड़ेगा।
उदाहरण के तौर पर चीनी, कपूर और गुलाल का इस्तेमाल होली जलाने के लिए करना पड़ेगा। तभी होली आग पकड़ेगी और लोग अपनी बाल को सेक सकेंगे। वर्षा के साथ तेज तूफान से मौसम भी काफी हद तक बिगड़ गया और मौसम भी पहले से काफी ठंडा हो गया। हालांकि, लोगों ने गर्मी बढ़ने के साथ ही पंखे चलना शुरू कर दिए थे। लेकिन आज पंखे भी नहीं चलाने पड़ रहे।
यह भी पढ़ें: राजस्थान में सीएनजी के दाम कम हुए, दो रुपये 12 पैसे प्रति किलोग्राम मिलेगी सस्ती
तूफान के चलते जगह-जगह कई पेड़ भी क्षतिग्रस्त हो गए और जो पेड़ बच भी गए, उनके पत्ते पूरी तरह झड़ गए। बारिश के कारण जगह-जगह थोड़ा बहुत पानी भी सड़कों पर जमा दिखाई दिया।हालात यह हो गए कि बारिश और तूफान से शहर का जनजीवन भी अस्त-व्यस्त हो गया और जो लोग बाजारों में खरीदारी करने गए हुए थे, वे लोग वापस अपने घरों को लौट गए या फिर बाजारों में इधर-उधर दुकानों के साए में छुपते फिरे। हालांकि, यह तूफान और बारिश ज्यादा देर नहीं चली।लेकिन इस मौसम ने सभी को परेशानी में डाल दिया और सब कुछ अस्त-व्यस्त कर डाला।
यह भी पढ़ें: होली पर निकला सेठ-सेठानी का स्वांग, पूरे शहर में गूंजे ठहाके, हंसी-मजाक से सराबोर हुआ बाजार