शिव शक्ति माँ बगलामुखी धाम में होली उत्सव में राधाकृष्ण स्वरूप ने भक्तों के साथ सुन्दर फूलों की सुगंधित पुष्पों से होली भगवान के साथ खेली। मंदिर प्रबंधक कमेटी उपाध्यक्ष रमन शर्मा, महासचिव रुपेश धीर, कोषाध्यक्ष तरुण मित्तल, यज्ञ के मुख्य यजमान अंकित गुप्ता, अनु बंसल, रेखा मित्तल, वीके मित्तल ने शांति यज्ञ कर लंगर का आयोजन किया। इस अवसर पर धाम के अध्यक्ष पंडित विजय शास्त्री ने कहा जिस ज्ञानी महापुरुषों के मन में किसी भी प्रकार की कामना नहीं वे सर्वदा निष्काम और आप्तकाम है उनको यहीं ब्रह्म के दर्शन व प्राप्ति हो जाती है। ग्रंथों में लिखा है यदि हमने वर्तमान संभाल लिया, प्रारब्ध कर्म का उपभोग शास्त्रोंचित ढंग से किया तो शरीर नष्ट हो जाने पर ब्रह्मलोक परमात्मा को जीव प्राप्त हो जाता है। शास्त्री ने कहा "जन्माद्यस्य यतजड़ः" - जो जड़ चेतनात्मक जगत सर्वसाधारण के देखने सुनने और अनुभव में आ रहा है उसकी अद्भुत रचना के किसी एक अंश पर भी विचार करने से बड़े बड़े वैज्ञानिकों को आश्चर्य चकित होना पड़ता है। जैसे हमारे शरीर को नियमित रूप से संचालन करता है, समस्त विश्व को अपने में विलीन कर लेता है वह परमात्मा ही ब्रह्म हैं। देखिए भाव यह है कि देवता दैत्य मनुष्य पशु पक्षी आदि अनेक जीवों से परिपूर्ण सूर्य, चंद्रमा, तारा, नाना लोक तारों से सम्पन्न यह अनंत ब्रह्मांड का कर्ता धर्ता कोई अवश्य हैं। मनुष्यों की समझ में आ सकता है वहीं भ्रम में है उसी को परमेश्वर परमात्मा भगवान आदि नामों से हम सब जानते हैं। वेदान्त दर्शन में लिखा है जो जानकर ब्रह्म की साधना ध्यान चिंतन नहीं करता वह जगत में पशुओं के समान ही है। इस अवसर पर रमा शर्मा, गौरी शर्मा, सरिता शर्मा, पंडित बनवारी, सुनील कुमार गुप्ता, बैजन्ती गुप्ता तथा विकास गुप्ता आदि भी उपस्थित थे।